खबर डिजिटल संवाददाता कटनी– औद्योगिक क्षेत्र की एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर फैक्ट्रियों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। माधवनगर थाना क्षेत्र स्थित एबीएस (मित्तल) फैक्ट्री में ऊंचाई से गिरकर मजदूर उदय मौर्य की मौत के मामले में पुलिस ने पूरे दो महीने बाद एफआईआर दर्ज की है, जिससे पुलिस कार्रवाई और फैक्ट्री प्रबंधन दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं।12 अप्रैल की शाम फैक्ट्री में काम के दौरान उदय मौर्य ऊंचाई से नीचे गिर गया था। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मजदूरों को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के जोखिम भरे कार्य में लगाए जाने के आरोप लगाए थे। आरोप है कि मौके पर न तो पर्याप्त सेफ्टी बेल्ट की व्यवस्था थी और न ही अन्य जरूरी सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए गए थे।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक मजदूर की जान चली गई थी, तब तत्काल आपराधिक मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया? पुलिस ने घटना के बाद केवल मर्ग कायम कर मामले को जांच में रखा। परिजनों को दो महीने तक कार्रवाई का इंतजार करना पड़ा। अब अपराध क्रमांक 508/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) में मामला दर्ज किया गया है।इस पूरे प्रकरण ने श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि कई निजी फैक्ट्रियों में सुरक्षा नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त होते तो क्या उदय मौर्य की जान बच सकती थी?परिवार ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट देरी से मिलने के कारण जांच प्रभावित हुई, लेकिन अब मामले की जांच तेज कर दी गई है और फैक्ट्री के सेफ्टी रिकॉर्ड सहित जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।मजदूर की मौत के बाद दो महीने तक कार्रवाई का इंतजार—यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि उन तमाम सवालों की कहानी है जो औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
reported by saurabh shrivastava mo. 9131308097
