मध्यप्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं. चुनाव प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने और आरक्षण से जुड़ी औपचारिकताओं में किसी तरह की देरी न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है. नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास को आरक्षण प्रक्रिया का विहित प्राधिकारी नियुक्त किया गया है. इस फैसले के साथ ही महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है. वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत और महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था भी लागू रहेगी.
पिछली देरी से सबक लेकर आगे बढ़ रही सरकार
सरकार इस बार चुनावी तैयारियों में किसी भी तरह की बाधा नहीं चाहती. यही कारण है कि अप्रैल-मई 2027 में होने वाले संभावित चुनावों से काफी पहले ही आरक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर काम शुरू कर दिया गया है. दरअसल, वर्ष 2019 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव कई कारणों से समय पर नहीं हो सके थे. राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव, कोरोना महामारी और ओबीसी आरक्षण को लेकर चले कानूनी विवाद के चलते चुनाव लंबे समय तक टलते रहे. मामला उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था. बाद में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के साथ वर्ष 2022 में चुनाव संपन्न कराए गए. अब सरकार पहले से तैयारी कर ऐसे हालात दोबारा पैदा नहीं होने देना चाहती.
लॉटरी के जरिए तय होगा आरक्षण
महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष पदों का आरक्षण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा. इसमें सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सीटों का निर्धारण किया जाएगा. प्रदेश के 16 नगर निगमों में कौन-सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी, इसका फैसला लॉटरी प्रणाली से किया जाएगा. महिलाओं के लिए कुल पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित रहेगा. वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या के आधार पर तय किया जाएगा. इसके बाद चक्रानुक्रम प्रणाली के अनुसार ओबीसी आरक्षण लागू किया जाएगा.
वर्तमान में नगर निगमों की आरक्षण स्थिति
फिलहाल इंदौर, जबलपुर, रीवा और सिंगरौली नगर निगम सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हैं. ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, सागर और कटनी सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हैं. रतलाम और सतना ओबीसी वर्ग के अंतर्गत आते हैं, जबकि भोपाल और खंडवा ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा उज्जैन अनुसूचित जाति वर्ग, मुरैना अनुसूचित जाति महिला वर्ग और छिंदवाड़ा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है.
निर्वाचन आयोग ने भी बढ़ाई सक्रियता
चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिसके लिए भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा. इसके साथ ही सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की उपलब्धता और अन्य चुनावी संसाधनों से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है. इन तैयारियों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों ही आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं. आने वाले समय में आरक्षण प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कदम प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं.
