मध्य प्रदेश कांग्रेस में इन दिनों आंतरिक खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच कथित मतभेदों की खबरें अब संगठन के निचले स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही हैं. हाल के घटनाक्रमों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो के बाद कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं भी खुलकर सामने आने लगी हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है. इसी बीच कांग्रेस कार्यकर्ता सीताराम यादव का एक बयान सुर्खियों में आ गया है. उन्होंने वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि पार्टी को अपने अनुभवी नेताओं का सम्मान बनाए रखना चाहिए. यादव के मुताबिक, दिग्विजय सिंह लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं और संगठन को मजबूत बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा है. ऐसे में उनके अनुभव और भूमिका को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा.
हरीश चौधरी को लेकर भी उठी चर्चा
सीताराम यादव ने अपने बयान में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना जरूरी है. उनका मानना है कि आपसी समन्वय और संवाद से ही पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना प्रभावी तरीके से कर सकती है.
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
कांग्रेस के भीतर चल रही चर्चाओं को हाल ही में सामने आए दो वीडियो ने और अधिक हवा दे दी है. ये वीडियो उस समय के बताए जा रहे हैं जब राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद और कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने के बाद पार्टी विरोध प्रदर्शन कर रही थी. पहले वीडियो में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह और हरीश चौधरी के बीच हुई बातचीत को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. वहीं दूसरे वीडियो में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह और हरीश चौधरी एक ही मंच पर नजर आते हैं. कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर हुई हल्की हलचल और उसके बाद दिग्विजय सिंह का अलग स्थान पर जाकर बैठना भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया.
विपक्ष को मिला हमला बोलने का मौका
वर्तमान में कांग्रेस राज्यसभा चुनाव और नामांकन निरस्तीकरण के मुद्दे को लेकर भाजपा तथा निर्वाचन आयोग के खिलाफ आंदोलन चला रही है. लेकिन इसी दौरान सामने आए वीडियो और नेताओं से जुड़ी चर्चाओं ने पार्टी के भीतर एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय से विपक्ष में बैठी कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकता बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे समय में सार्वजनिक रूप से सामने आने वाली असहमति पार्टी की रणनीति और संदेश दोनों को प्रभावित कर सकती है. वहीं भाजपा भी इन घटनाओं को कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी बताकर लगातार राजनीतिक हमला कर रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है.
