केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन दिवसीय गुना दौरे के दौरान भाजपा की एक अहम बैठक हुई, लेकिन संगठन को मजबूत बनाने की रणनीति पर चर्चा से ज्यादा नेताओं की नाराजगी और आपसी मतभेद सुर्खियों में रहे. तेलघानी स्थित एक होटल में आयोजित इस बैठक में कई नेताओं ने अपनी शिकायतें खुलकर रखीं. माहौल इतना असहज हो गया कि सिंधिया को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा और नेताओं को सख्त लहजे में नसीहत देनी पड़ी.
सिंधिया ने नेताओं को दी साफ सलाह
बैठक के दौरान सिंधिया ने कहा कि लगातार शिकायत करने की आदत छोड़नी होगी. उन्होंने नेताओं को याद दिलाया कि भाजपा राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया के सिद्धांतों और मेहनत से मजबूत हुई है. ऐसे में सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं की जिम्मेदारी संगठन को आगे बढ़ाने की होनी चाहिए, न कि एक-दूसरे की कमियां गिनाने की.
उन्होंने मौजूद नेताओं से यह भी कहा कि सिर्फ शिकायतें करने के बजाय यह बताइए कि संगठन और जनता के हित में आपने खुद क्या सकारात्मक काम किया है. हालांकि, जब व्यापार प्रकोष्ठ और चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि उनके दौरे की जानकारी पहले से मिल जाए तो स्थानीय स्तर पर जनहित के कार्यक्रम बेहतर तरीके से आयोजित किए जा सकते हैं, तो सिंधिया ने इस सुझाव की सराहना की और व्यवस्था को और बेहतर बनाने का भरोसा दिया.
कई बड़े नेता और पार्षद रहे नदारद
इस बैठक का एक बड़ा पहलू कई प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी भी रही. विधायक पन्नालाल शाक्य और प्रियंका मीना बैठक में शामिल नहीं हुए. पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा और राधेश्याम पारीख भी नहीं पहुंचे. वहीं गुना नगर पालिका के कई भाजपा पार्षदों ने भी दूरी बनाए रखी.
सूत्रों के मुताबिक, पार्षद नगर पालिका अध्यक्ष की कार्यशैली से लंबे समय से नाराज हैं. उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी वजह से उन्होंने विरोध जताते हुए इस बैठक से दूरी बनाई.
गुटबाजी को लेकर बढ़ी चिंता
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के विधायकों, पूर्व विधायकों और पार्षदों की गैरहाजिरी संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी का संकेत है. उनका कहना है कि अगर समय रहते इन मतभेदों को दूर नहीं किया गया तो आने वाले समय में पार्टी को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
संगठन में प्रतिनिधित्व को लेकर भी उठे सवाल
बैठक के बाद कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने संगठनात्मक संतुलन को लेकर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि पहले प्रदेश कार्यकारिणी में गुना जिले के करीब 10 नेताओं को जगह मिलती थी, जिससे सभी क्षेत्रों और गुटों का प्रतिनिधित्व बना रहता था. लेकिन मौजूदा कार्यकारिणी में सिर्फ हरीसिंह यादव, महेंद्र सिंह सिसौदिया और गजेंद्र सिकरवार को ही स्थान मिला है. वहीं राजेंद्र सलूजा, गोविंद राठी और राधेश्याम पारीख जैसे वरिष्ठ नेताओं को इस बार जगह नहीं मिली.
कुछ नेताओं ने यह आरोप भी लगाया कि जिले में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है. उनका मानना है कि इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले कई नेताओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पा रहा है और इसी वजह से संगठन के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है.
