मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है. निर्वाचन आयोग की ओर से अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित की गई है. इसके बाद से ही दतिया के साथ-साथ पूरे प्रदेश की राजनीति इस सीट पर केंद्रित हो गई है. यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है.
बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा, कांग्रेस के लिए चुनौती
दतिया सीट पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में गई थी. यह वही सीट है जहां प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में भाजपा इस उपचुनाव को अपनी खोई हुई सीट वापस हासिल करने का बड़ा अवसर मान रही है. दूसरी ओर कांग्रेस भी इस सीट को बचाकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है.
नरोत्तम मिश्रा के नाम पर लगभग बनी सहमति
हालांकि भाजपा और कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम लगभग तय माना जा रहा है. माना जा रहा है कि केवल औपचारिक घोषणा होना बाकी है. पार्टी नेतृत्व उनके अनुभव और क्षेत्र में मजबूत पकड़ को देखते हुए उन पर भरोसा जता सकता है.
क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं नरोत्तम मिश्रा
2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया से दूरी नहीं बनाई. वे लगातार क्षेत्र का दौरा करते रहे, स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल हुए और लोगों के बीच अपनी सक्रियता बनाए रखी. यही कारण है कि भाजपा संगठन में उन्हें अब भी मजबूत और प्रभावशाली नेता माना जाता है.
जानकारों का मानना है कि यदि उपचुनाव में उन्हें जीत मिलती है तो प्रदेश सरकार में उन्हें फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है. यही वजह है कि इस चुनाव को उनकी राजनीतिक वापसी के रूप में भी देखा जा रहा है.
बीजेपी संगठन में मजबूत पकड़ का मिल सकता है फायदा
दतिया जिले के भाजपा नेताओं के साथ डॉ. नरोत्तम मिश्रा का बेहतर समन्वय उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है. संगठन में उनकी स्वीकार्यता और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा दिखाई देता है. चुनाव प्रचार के दौरान यही नेटवर्क भाजपा के लिए अहम भूमिका निभा सकता है.
पिछली हार का अंतर और नए समीकरण
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों के अंतर से हराया था. यही नतीजा इस उपचुनाव को और अधिक दिलचस्प बना रहा है. भाजपा इस बार पिछली हार का हिसाब बराबर करने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस जीत का सिलसिला बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगाएगी.
तीसरे दल की मौजूदगी बदल सकती है मुकाबला
इस बार दतिया उपचुनाव में भारत आजाद पार्टी के मैदान में उतरने की संभावना भी चर्चा का विषय बनी हुई है. यदि तीसरा दल प्रभावी प्रदर्शन करता है तो वोटों का बंटवारा चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में मुकाबला पहले से अधिक रोचक और कांटे का होने की उम्मीद है.
दतिया उपचुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला बनता जा रहा है. सभी की नजर अब राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा और चुनाव प्रचार की रणनीति पर टिकी हुई है.
