मुरैना जिले के दिमनी कस्बे में एक बार फिर एक्सपायर शराब की बिक्री का मामला सामने आया है. आरोप है कि आबकारी विभाग के लाइसेंसी शराब ठेके पर करीब 20 दिन पहले एक्सपायर हो चुकी शराब खुलेआम बेची जा रही है. सबसे हैरानी की बात यह है कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इस शराब को बाजार भाव से काफी कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है. सस्ती शराब मिलने की वजह से आसपास के गांवों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं.
आधी कीमत में मिल रही शराब
दिमनी के लहर रोड स्थित शराब दुकान पर अंग्रेजी और देसी दोनों तरह की शराब उपलब्ध है. जिले के अन्य हिस्सों में जहां देसी शराब का एक पउआ 70 से 75 रुपये में बिक रहा है, वहीं यहां वही पउआ मात्र 40 रुपये में दिया जा रहा है. इतना ही नहीं, 100 रुपये में तीन पउआ तक बेचे जाने की बात सामने आई है. बोतलों पर दर्ज जानकारी के अनुसार इनकी पैकिंग 7 जुलाई 2025 की है और निर्माता ने स्पष्ट रूप से एक वर्ष बाद इन्हें एक्सपायर बताया है. यानी 7 जुलाई 2026 के बाद यह शराब उपयोग योग्य नहीं रही, लेकिन इसके बावजूद इसकी बिक्री जारी होने के आरोप लग रहे हैं.
दूसरे शहरों से भी पहुंच रहे ग्राहक
कम कीमत के कारण दिमनी का यह ठेका आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है. बताया जा रहा है कि मुरैना, अंबाह और पोरसा सहित कई इलाकों से लोग यहां शराब खरीदने पहुंच रहे हैं. भीड़ को देखते हुए दुकान पर दो अलग-अलग काउंटर बनाए गए हैं. स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि यहां बड़ी मात्रा में संदिग्ध या अवैध शराब भी पहुंच रही हो सकती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस ठेके का लाइसेंस नरेंद्र सिंह तोमर निवासी बित्तपुरा के नाम पर दर्ज है.
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि कुछ समय पहले भी जिले में एक्सपायर शराब का मामला सामने आया था. जून 2026 में आबकारी विभाग के भंडारगृह से एक्सपायर शराब की 260 पेटियां विभिन्न ठेकों पर भेज दी गई थीं. मामले की जांच के बाद तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था. इसके बावजूद दोबारा ऐसा मामला सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
स्वास्थ्य और कानून दोनों के लिए खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपायर शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. ऐसी शराब में रासायनिक परिवर्तन होने के साथ बैक्टीरिया पनपने की संभावना भी बढ़ जाती है. इससे फूड पॉइजनिंग, उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में परेशानी, धुंधला दिखाई देना और लिवर व किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है. वहीं आबकारी नियमों के अनुसार निर्धारित न्यूनतम और अधिकतम मूल्य से कम कीमत पर शराब बेचना भी लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन माना जाता है. ऐसे मामलों में संबंधित ठेकेदार के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण सहित विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.
