भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ राजधानी के अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़िया कलां, गुलमोहर सहित अन्य आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले हजारों व्यापारियों को फिलहाल राहत मिल गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। नगर निगम की हालिया सीलिंग कार्रवाई और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद इन क्षेत्रों के हजारों व्यापारी असमंजस की स्थिति में थे। पूरे शहर में 30 हजार से अधिक दुकानों पर कार्रवाई की आशंका जताई जा रही थी।
10 सदस्यीय समिति करेगी विस्तृत समीक्षा
राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कानूनी प्रक्रिया, नीतिगत पहलुओं, व्यावहारिक समाधान तथा मौजूदा नियमों की समीक्षा करेगी। समिति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), श्रम, पर्यावरण, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग तथा भोपाल नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। विभिन्न पक्षों से चर्चा के बाद समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
फिलहाल नहीं होगी सख्त कार्रवाई
नगर निगम ने अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और अन्य क्षेत्रों के करीब एक हजार प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे, जबकि कुछ दुकानों को सील भी किया गया था। व्यापारियों के विरोध के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक किसी भी व्यापारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस फैसले के बाद सील की गई या बंद कराई गई दुकानों के दोबारा खुलने की संभावना बढ़ गई है।
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रहवासी समितियों ने उठाए सवाल
संयुक्त रहवासी समिति ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। समिति का आरोप है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की बजाय केवल औपचारिकता निभाई गई। उनका दावा है कि कई प्रतिष्ठानों के बाहर बंद होने के बोर्ड लगाए गए और उसकी तस्वीरें निगम को भेजी गईं, लेकिन शाम तक अधिकांश दुकानें दोबारा खुल गईं।
4 अगस्त की सुनवाई पर टिकी निगाहें
रहवासी संगठनों का आरोप है कि नगर निगम ने कुछ व्यापारियों को 4 अगस्त तक राहत का भरोसा दिया है। उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तावित सुनवाई से पहले कार्रवाई का वास्तविक स्वरूप सामने आएगा। रहवासी संघों ने यह भी आरोप लगाया कि भू-उपयोग नियमों के उल्लंघन के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
कई इलाकों में जारी हुए नोटिस
शनिवार और रविवार को नगर निगम ने अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़िया कलां सहित कई आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान चलाया। अनेक प्रतिष्ठानों के बाहर सूचना बोर्ड लगाए गए, जिन पर लिखा था कि नगर निगम के आदेशानुसार भवन में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। नगर निगम के अनुसार अब तक शहरभर में 1,018 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। लंबे समय से आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक उपयोग को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। इसी क्रम में अरेरा कॉलोनी और बावड़िया कलां के 19 बड़े शोरूम और रेस्तरां को 24 घंटे के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए थे।
व्यापारियों ने रखी अपनी बात
व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से निर्धारित दरों पर बिजली बिल, संपत्ति कर, ट्रेड लाइसेंस शुल्क और जीएसटी का नियमित भुगतान कर रहे हैं। 10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि वैध शुल्क जमा करने के बावजूद व्यापारियों को अचानक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नगर निगम के सिटी इंजीनियर अनिल टेंटवाले ने कहा कि निगम की कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है और तालाबंदी तथा सीलिंग की प्रक्रिया उसी के तहत संचालित हुई।
