भोपाल। मध्यप्रदेश में दो से ज्यादा संतान होने पर सरकारी नौकरी से जुड़े करीब 25 साल पुराने नियम को खत्म करने की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस प्रतिबंध को हटाने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) अब तक संशोधित प्रस्ताव कैबिनेट के सामने नहीं रख सका है।
वरिष्ठ सचिव समिति में प्रस्ताव पर नहीं बनी सहमति
मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्य सचिव अनुराग जैन के कार्यकाल में सीनियर सचिव समिति की बैठक में इस नियम को खत्म करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। बताया गया कि समिति के सदस्यों ने प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। इसके चलते मामला आगे कैबिनेट तक नहीं पहुंच सका।
कर्मचारी संगठन कर रहे नियम हटाने की मांग
दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी में रोक लगाने वाले नियम का कर्मचारी संगठन लगातार विरोध करते रहे हैं। राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री नियम हटाने की बात स्पष्ट रूप से कह चुके हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर इस पर आगे कार्रवाई नहीं हो रही है।
2001 में लागू हुआ था नियम
मध्यप्रदेश में दो से अधिक संतान को लेकर यह प्रावधान वर्ष 2001 में लागू किया गया था। इसके तहत 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्ति के लिए अपात्र माना गया था। इसके अलावा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 में भी दो से अधिक बच्चों को कदाचार से जुड़े प्रावधान में शामिल किया गया था। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद नियम खत्म करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से इस मामले में सरकार और ब्यूरोक्रेसी के बीच मतभेद को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
CM ने जताई थी आपत्ति
6 जून 2026 को जारी किए गए GAD के प्रस्तावित ड्राफ्ट में दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों पर लगी रोक को बरकरार रखा गया था। ड्राफ्ट के अनुसार, जिस उम्मीदवार की दो से अधिक संतान हैं और इनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं माना जाता। मुख्यमंत्री ने इस प्रावधान को हटाने के निर्देश दिए थे और ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाकर संशोधित प्रारूप जारी करने को कहा था। हालांकि अब तक इस संबंध में नया नियम या आदेश जारी नहीं हुआ है।
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