खबर डिजिटल न्यूज़ कटनी– जिले में पशुओं के अवैध और कथित क्रूरतापूर्ण परिवहन का कारोबार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। निवार चौकी पुलिस ने एनएच-30 पर कार्रवाई करते हुए एक 12 चक्का टाटा ट्रक से 354 भेड़-बकरियों को बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, ट्रक में पशुओं को दो पार्टिशन बनाकर बेहद तंग परिस्थितियों में ठूंसकर ले जाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान चार भेड़ें मृत मिलीं, जबकि 310 भेड़ और 40 बकरी-बकरे जीवित बरामद किए गए। मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर ट्रक जब्त किया है।
चार पशुओं की मौत ने खड़े किए गंभीर सवालएक ही ट्रक में 354 पशुओं को ले जाने और उसमें चार पशुओं के मृत मिलने की घटना ने परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में पशुओं को किस परिस्थिति में एक वाहन में भरा गया और रास्ते में उनकी निगरानी तथा सुरक्षा की क्या व्यवस्था थी?पुलिस के मुताबिक ट्रक में दो अलग-अलग पार्टिशन बनाए गए थे और उनमें बड़ी संख्या में पशुओं को भरा गया था। तलाशी के दौरान चार भेड़ें मृत मिलीं। यह स्थिति पशुओं के परिवहन में निर्धारित नियमों के पालन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
मुखबिर की सूचना पर नाकेबंदी, ढाबे के सामने पकड़ा ट्रकपुलिस के अनुसार पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य के मार्गदर्शन में अवैध पशु परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसी दौरान निवार चौकी पुलिस को सूचना मिली कि MP17HH3130 नंबर के 12 चक्का टाटा ट्रक में क्षमता से अधिक पशुओं को भरकर कटनी से जबलपुर की ओर ले जाया जा रहा है।सूचना पर पुलिस टीम ने एनएच-30 स्थित लखापतेरी के पंछी ढाबे के सामने घेराबंदी कर ट्रक को रोका।
तलाशी में ट्रक के अंदर बड़ी संख्या में भेड़-बकरियां मिलीं। गिनती में कुल 354 पशु बरामद हुए।310 भेड़, 40 बकरी-बकरे और चार मृतपुलिस के अनुसार ट्रक से कुल 354 पशु बरामद हुए। इनमें 310 जीवित भेड़, चार मृत भेड़ और 40 बकरी-बकरे शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वाहन में मौजूद लोगों से पशु परिवहन संबंधी आवश्यक दस्तावेज और वैध परमिट मांगे गए, लेकिन वे संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
सात आरोपी गिरफ्तार मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें जितेन्द्र कुमार वर्मा, मोहम्मद मुस्तफा उर्फ बबलू, संतलाल गोंड, रनबहादुर सिंह, बब्बन सिंह, गुरुदेव सिंह और अशोक शुक्ला शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पशुओं को कहां से लाया गया था और उन्हें किस स्थान पर ले जाया जा रहा था।पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाईनिवार चौकी पुलिस ने ट्रक और पशुओं को जब्त कर आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(क), 11(ए)(ई) तथा मोटरयान अधिनियम की धारा 66/192(ए) के तहत मामला दर्ज किया है।
मामले की जांच जारी है।क्या सिर्फ एक ट्रक पकड़ने से रुकेगा यह कारोबार?निवार पुलिस की कार्रवाई निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण है, लेकिन इस घटना ने जिले में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध पशु परिवहन के नेटवर्क को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लगातार सामने आती रही है कि बुधवार और रविवार के दिनों में बड़ी संख्या में भेड़-बकरियों से भरे वाहन कटनी बाईपास और आसपास के मार्गों से गुजरते हैं।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, लेकिन यदि वास्तव में बड़ी संख्या में वाहन नियमित रूप से इसी मार्ग से गुजर रहे हैं तो पुलिस और संबंधित विभागों के सामने इन वाहनों की व्यवस्थित जांच और निगरानी की चुनौती है।स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप सामने आते रहे हैं कि ऐसे पशुओं को जबलपुर के रास्ते दूसरे राज्यों की मंडियों तक भेजा जाता है। इन दावों की भी जांच होना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पशुओं का परिवहन वैध दस्तावेजों और निर्धारित नियमों के तहत हो रहा है या नहीं।
पहले भी सामने आ चुके हैं हादसों के दावेक्रूरतापूर्ण तरीके से क्षमता से अधिक पशुओं को वाहनों में भरकर ले जाने को लेकर समय-समय पर वाहन पलटने और पशुओं की मौत जैसी घटनाओं की चर्चाएं सामने आती रही हैं। यदि परिवहन के दौरान वाहन दुर्घटनाग्रस्त होता है तो सबसे ज्यादा नुकसान उन बेजुबान पशुओं को उठाना पड़ता है, जिन्हें पहले ही अत्यधिक संख्या में वाहन के भीतर ठूंस दिया जाता है।ऐसे में सवाल केवल अवैध परिवहन का नहीं, बल्कि पशु कल्याण, परिवहन सुरक्षा और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था का भी है।
नेटवर्क की तह तक पहुंचने की जरूरतनिवार पुलिस ने एक ट्रक पकड़कर कार्रवाई जरूर की है, लेकिन अब जरूरत केवल गिरफ्तारियों तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच करने की है। पशु कहां से खरीदे गए, किसने वाहन उपलब्ध कराया, किस मार्ग से ले जाए जा रहे थे, अंतिम मंडी या गंतव्य क्या था और क्या इससे जुड़े अन्य वाहन भी इसी नेटवर्क में शामिल हैं—इन सभी बिंदुओं की जांच से ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है
एक तरफ पुलिस अवैध पशु परिवहन पर लगातार कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ 354 पशुओं को एक ट्रक में ठूंसकर ले जाने और चार पशुओं के मृत मिलने की घटना यह सवाल जरूर छोड़ गई है कि आखिर निगरानी तंत्र की नजर से इतनी बड़ी संख्या में पशुओं से भरा वाहन कब तक निकलता रहा। अब देखना होगा कि पुलिस की जांच इस एक ट्रक तक सीमित रहती है या कथित पशु तस्करी नेटवर्क की जड़ तक पहुंचती है।
कार्रवाई में इनकी रही भूमिकापूरी कार्रवाई में निवार चौकी प्रभारी सउनि अंजनी कुमार मिश्र, सउनि कमलेश प्रसाद शुक्ला, प्रधान आरक्षक गौरव सेन और प्रधान आरक्षक संतोष प्रजापति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
