इंदौर/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ दतिया उपचुनाव में हार के बाद अब इंदौर से एक बार फिर मोहन सरकार का लिटमस टेस्ट होने वाला है। यहां पर कड़ी अग्निपरीक्षा से सरकार को गुजरना होगा, क्योंकि दीवाली से पहले कांग्रेस के कब्जे वाले दो वार्डों में सरकार को उपचुनाव का सामना करना पड़ेगा, और दोनों ही वार्ड मुस्लिम बहुल वार्ड हैं। यहां पर एक बार फिर हार मिलने पर पार्टी आलाकमान बड़ा फैसला लेने की तरफ आगे बढ़ सकता है, क्योंकि लगातार हार से पार्टी की छवि पर बुरा असर पड़ता नजर आएगा। संगठन के मजबूत किले के रुप में पहचानी जाने वाली बीजेपी के लिए यह उपचुनाव बेहद ही खास होंगे। जिसको जीतने के लिए सत्ताधारी दल पूरी ताकत के साथ मैदान में होगा।
जल्द होगी चुनाव की घोषणा
सितंबर महीने में किसी भी दिन दोनों वार्डों में उपचुनाव की तारीखों की घोषणा हो जाएगी। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही उपचुनाव में भरपूर मेहनत करेंगे। ये दोनों ही वार्ड सनातनी विधायक कहलाने वाले गोलू शुक्ला की तीन नंबर विधानसभा में आते हैं। नगर निगम चुनाव के वक्त इस विधानसभा के विधायक मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के सुपुत्र आकाश विजयवर्गीय हुआ करते थे। अब गेंद गोलू शुक्ला के पाले में है। ये वार्ड 58 और 60 नंबर हैं। जिनमें आने वाले वक्त में लंबी रस्साकस्सी देखने को मिलेगी।
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बीजेपी की तरफ से कौन चेहरा?
पिछली बार 58 नंबर वार्ड से सनी राजू चौहान ने चुनाव लड़ा था, और 60 नंबर से रंजना अनिल पिपले ने चुनाव लड़ा था। अब जानकार बता रहे हैं कि सनी चौहान की जगह किसी नए चेहरे को मैदान में उतारा जा सकता है। कहा जा रहा है कि किसी कांग्रेसी को भी बीजेपी में लाकर चुनाव लड़ाया जा सकता है, जिसका नाम भी जल्द खबर डिजिटल पर आपको पता चल जाएगा। जानकारों के मुताबिक महिला मोर्चा के नगर अध्यक्ष पद से चूंकने वाली माधुरी जायसवाल को भी बीजेपी टिकट थमा सकती है। इसी तरह 60 नंबर वार्ड में रंजना पिपले और उनके पुत्र की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जहां पर बीजेपी शेखर वर्मा या पारस खिंची को टिकट दे सकती है।
क्यों हो रहे उपचुनाव?
इंदौर में 58 नंबर वार्ड से कांग्रेस के टिकट से पार्षद पद का चुनाव लड़े अनवर कादरी को भाजपा परिषद के पार्षदों ने बहुमत के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया था, क्योंकि लव जिहाद के लिए फंडिंग करने के मामले में फिलहाल वो जेल में बंद हैं। इसी तरह वार्ड क्रमांक 60 की पार्षद सुनेहरा अंसारी की पार्षद की कुर्सी इंदौर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने शून्य घोषित कर दी थी। सामने खड़े हुए एक निर्दलीय पार्षद मुन्ना अंसारी कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिन पर नामांकन फार्म में संपत्ति की जानकारी छिपाने का आरोप लगा था।
