उत्तर प्रदेश की सियासत में मुरादाबाद जिले को समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच कड़े मुकाबले वाले इलाकों में गिना जाता है. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से जिले की राजनीति में इन दोनों दलों का प्रभाव लगातार देखने को मिला है. मुरादाबाद में कुल 6 विधानसभा सीटें हैं और इनमें से कोई भी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं है. बिलारी और कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र संभल लोकसभा सीट के अंतर्गत आते हैं.
2022 में सपा का दबदबा, उपचुनाव में BJP ने मारी बाजी
2022 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद जिले की छह सीटों में से पांच पर समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी. वहीं भाजपा के खाते में सिर्फ एक सीट आई थी. हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद कुंदरकी सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने सपा को हराकर समीकरण बदल दिए.
मौजूदा स्थिति में जिले में सपा के चार विधायक हैं, जबकि भाजपा के दो विधायक हैं.
मुरादाबाद शहर सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प
मुरादाबाद शहर विधानसभा सीट का नंबर 28 है और यह मुख्य रूप से शहरी क्षेत्र में आती है. पीतल कारोबार के लिए मशहूर इस इलाके में बड़ी संख्या में लोग ब्रास इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं.
2012 में यहां समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 2017 और 2022 के चुनाव में भाजपा के रितेश कुमार गुप्ता ने लगातार जीत हासिल की. खास बात यह रही कि 2022 में दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला आखिरी दौर तक बेहद करीबी रहा.
SIR के बाद 4.83 लाख मतदाता
SIR प्रक्रिया के बाद मुरादाबाद शहर विधानसभा क्षेत्र में अब 4,83,034 मतदाता बचे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां कुल 5,38,363 मतदाता दर्ज थे. यानी SIR के बाद करीब 55,329 मतदाताओं की संख्या कम हुई है.
सिर्फ 782 वोटों से तय हुआ था नतीजा
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रितेश गुप्ता ने सपा के युसूफ अंसारी को महज 782 वोटों के अंतर से हराया था.
दोनों उम्मीदवारों को डेढ़ लाख के करीब वोट मिले थे. भाजपा को 1,48,384 और सपा को 1,47,602 वोट मिले. बसपा को 14,013, कांग्रेस को 5,351 और AIMIM को 2,661 वोट मिले.
वोट प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को 46.12 फीसदी, जबकि सपा को 45.88 फीसदी वोट हासिल हुए. यानी दोनों पार्टियों के बीच सिर्फ 0.24 प्रतिशत का अंतर था.
वोटों का समीकरण भी रहा अहम
2022 के चुनाव में सपा को मुख्य रूप से मुस्लिम और यादव मतदाताओं का समर्थन मिला, जबकि भाजपा को वैश्य, ब्राह्मण, क्षत्रिय, सैनी समेत कई OBC वर्गों का साथ मिला. भाजपा को SC समुदाय की कुछ जातियों का समर्थन भी मिला, जिनकी संख्या करीब 25 हजार बताई गई है.
वहीं बसपा अपने पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित रही. कांग्रेस और AIMIM को मिले वोटों में भी मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी मानी गई. ऐसे में मुरादाबाद शहर सीट पर जातीय और सामाजिक समीकरण आने वाले चुनाव में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं.
