Monday, November 2, 2026
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PM Vishwakarma Yojana: हुनर है तो सरकार देगी ₹3 लाख तक का लोन! ₹15,000 टूलकिट और ₹500 रोजाना

अगर आपके पास कोई पारंपरिक हुनर है और उसे कारोबार में बदलना चाहते हैं, लेकिन पैसों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, तो प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना आपके लिए मददगार साबित हो सकती है. केंद्र सरकार की इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक सहायता देने के साथ उनके काम को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाने में मदद करना है.

इस योजना में कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट के लिए आर्थिक सहायता और आसान शर्तों पर लोन की सुविधा दी जाती है. पात्र लाभार्थियों को ट्रेनिंग के दौरान रोजाना ₹500 का भत्ता भी मिलता है. वहीं, जरूरी औजार खरीदने के लिए ₹15,000 तक की सहायता दी जाती है. कारोबार को बढ़ाने के लिए चरणबद्ध तरीके से कुल ₹3 लाख तक का कर्ज लिया जा सकता है.

18 पारंपरिक कामों से जुड़े लोगों को लाभ

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में अलग-अलग पारंपरिक व्यवसाय करने वाले 18 तरह के कारीगरों और शिल्पकारों को शामिल किया गया है. इनमें बढ़ई, नाव बनाने वाले, लोहार, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, मोची और राजमिस्त्री जैसे काम शामिल हैं.

इसके अलावा ताला बनाने वाले, हथौड़ा और औजार तैयार करने वाले, टोकरी और चटाई बनाने वाले, पारंपरिक खिलौने व गुड़िया बनाने वाले, नाई, माला बनाने वाले, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले कारीगर भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं.

दो चरणों में मिल सकता है ₹3 लाख तक का लोन

योजना के तहत कारीगरों को कारोबार शुरू करने या उसे आगे बढ़ाने के लिए कर्ज की सुविधा दी जाती है. पहले चरण में अधिकतम ₹1 लाख तक का लोन मिल सकता है. इस कर्ज को समय पर चुकाने के बाद लाभार्थी दूसरे चरण में ₹2 लाख तक का अतिरिक्त ऋण लेने के लिए पात्र हो सकता है.

इस तरह दोनों चरणों को मिलाकर अधिकतम ₹3 लाख तक का कर्ज उपलब्ध हो सकता है. खास बात यह है कि योजना के तहत यह ऋण बिना किसी गारंटी के दिया जाता है.

सिर्फ 5 फीसदी ब्याज पर कर्ज

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में कारीगरों को रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है. लाभार्थी को 5 फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज मिलता है. सरकार की ओर से ब्याज में सहायता दी जाती है, जिससे कारीगरों पर लोन की लागत का बोझ कम रखने की कोशिश की गई है.

औजार खरीदने के लिए ₹15,000 की मदद

योजना में टूलकिट इंसेंटिव का भी प्रावधान है. पात्र कारीगरों को जरूरी उपकरण खरीदने के लिए ₹15,000 तक की सहायता दी जाती है. इससे बढ़ई, दर्जी, लोहार और दूसरे कारीगर अपने काम के लिए जरूरी औजार या उपकरण खरीद सकते हैं.

ट्रेनिंग के साथ रोजाना ₹500 भत्ता

कारीगरों को अपने हुनर को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है. बुनियादी ट्रेनिंग के दौरान लाभार्थियों को प्रतिदिन ₹500 का प्रशिक्षण भत्ता मिलता है. इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्नत प्रशिक्षण लेने का विकल्प भी उपलब्ध रहता है.

डिजिटल पेमेंट करने पर भी प्रोत्साहन

सरकार कारीगरों को डिजिटल लेनदेन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करती है. पात्र लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान पर प्रति लेनदेन ₹1 का प्रोत्साहन मिल सकता है. यह लाभ अधिकतम 100 लेनदेन तक दिया जा सकता है. इसका उद्देश्य छोटे कारीगरों और कारोबारियों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ना है.

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