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ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष को अमित शाह का करारा जवाब, अखिलेश यादव को दी नसीहत

लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सवालों का दिया जवाब...

लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हो रही चर्चा में गृह मंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उठ रहे विपक्ष के सवालों पर स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर ‘दुखी न होने’ की नसीहत दी। अमित शाह ने अखिलेश को आडे हाथों लिया तो कुछ ही देर बाद नंबर आ गया पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम का । चिदंबरम ने दो दिन पहले एक इंटरव्यू में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जिम्मेदार आतंकवादियो के पाकिस्तानी होने पर सवाल उठाए थे। अमित शाह ने चिदंबरम की टिप्पणी पर भी जवाब दिया और कहा कि सरकार के पास प्रूफ है कि वे तीनों पाकिस्तानी थे।

शाह ने कहा कि चिदंबरम को कुछ शक था तो मुझसे पूछ लेते । अमित शाह ने कहा कि तीन में से दो के पाकिस्तानी वोटर नंबर उनके पास उपलब्ध हैं। आतंकवादियों के पास राइफलें थीं, और उनके पास मिली चॉकलेट पाकिस्तान में बनी थी और चिदंबरम कहते हैं कि वो पाकिस्तानी नहीं थे। शाह ने संसद से ही देश को संदेश दिया और बताया कि कैसे मोदी सरकार आतंकवाद पर मुहंतोड जवाब दे रही है । उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइल और एयर स्ट्राइक तो पीओके में की गयी यानी भारत की सीमा में ही निशाना बनाया गया लेकिन इस बारआतंकवादियों को जवाब देने के लिए भारत पड़ोसी देश में 100 किलोमीटर अंदर गया। वहां जाकर 9 अड्डों और 100 से अधिक आतंकियों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। शाह ने एक एक आंकडों के जरिए आतंकवादी अड्डे गिनाए और ये भी बताया कि भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को तबाह किया, जिनमें से 8 एयरबेस पर सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।

लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सोमवार को चर्चा शुरु हुईं। इस दौरान, देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के तमाम आरोपों का जवाब दिया इसके बाद फिर शाम को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विपक्ष के आरोपों की हवा निकाली । लेकिन आज मंगलवार को बारी थी देश के गृहमंत्री अमित शाह की जिन्होंने अपने तर्कों से विरोधियों को चुप करा दिया। ऑपरेशन सिंदूर में संघर्ष विराम को लेकर उन्होंने सरकार का पक्ष रखा तो कांग्रेस की उसकी अतीत की गलतियां भी गिनायी ।
दरअसल, अमित शाह के भाषण की झलक तो चर्चा के पहले दिन ही मिल गयी थी जब विदेश मंत्री के भाषण के दौरान टोका टिप्पणी कर रहे विपक्ष के सदस्यों को उन्होंने इस बात के लिए जमकर लताड लगायी कि वो संविधान की शपथ लिए भारत के विदेश मंत्री की बात पर भरोसा करने की बजाए विदेशी नेताओं की बात पर भरोसा कर रहे हैं । उनकी बातों से ही विपक्ष के साथ ही राजनीतिक विश्लेषकों को लग गया था कि मंगलवार को अमित शाह विपक्ष पर भारी पडने वाले हैं । हुआ भी कुछ ऐसा ही । मंगलवार दोपहर 12 बजे के बाद अमित शाह ने जैसे ही चर्चा की शुरुआत की उन्होंने ऐसा बम फोड दिया कि विपक्ष के तरकश का एक अहम तीर उनके हाथ से छीन लिया ।

आज अमित शाह ने संसद के जरिए देश को एक बडी खबर दी, उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले तीन आतंकवादियों को सेना, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस ने ‘ऑपरेशन महादेव’ के ढेर कर दिया है । इन आतंकियों में सुलेमान उर्फ फैजल, अफगान और जिबरान शामिल हैं। साथ ही गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में विपक्ष को ‘ऑपरेशन महादेव’ की पूरी टाइमलाइन बताई। गृह मंत्री ने सदन को बताया कि इस ऑपरेशन की शुरुआत कब हुई और कैसे पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों को ढेर किया गया। अमित शाह ने ये भी बताया कि पहलगाम हमले के दौरान मिले कारतूस के खोखे और आतंकवादियों की राइफल के खोखे का मिलान चंडीगढ़ एफएसएल की रिपोर्ट से हुआ है। आतंकवादियों के पास से एक एम-9 अमेरिकन और दो एके-47 राइफल बरामद की गई थीं।

दरअसल, चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से बार बार ये बात की जा रही थी कि पहलगाम के गुनहगारों को अब तक क्यों नही पकडा जा सका । अब तक वो फरार क्यों है ?, सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही है? , इन सब सवालों के जवाब अमित शाह के खुलासे के बाद बेमानी हो गए। हालांकि, अमित शाह की ओर से न केवल ये जानकारी सदन को दी गयी बल्कि ये भी बताया गया कि आखिर ये आतंकवादी पकडे कैसे गए । अमित शाह न विपक्ष को ‘ऑपरेशन महादेव’ की पूरी टाइमलाइन बताई। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन की शुरुआत कब हुई और कैसे पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों को ढेर किया गया।

गौरतलब हो, विपक्ष संघर्ष विराम को लेकर भी सवाल उठाता रहा है । गृह मंत्री ने ‘संघर्ष विराम’ पर उठते सवालों का भी विस्तार से जवाब दिया और कहा कि युद्ध के कई परिणाम होते हैं। युद्ध सोच समझकर करना पड़ता है। ऑपरेशन सिंदूर में संघर्ष विराम को लेकर उन्होंने सरकार का पक्ष रखा तो कांग्रेस की उसकी अतीत की गलतियां भी गिनायी । गृह मंत्री ने कांग्रेस को 1948 के युद्ध की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस समय लड़ाई निर्णायक पड़ाव पर थी, लेकिन जवाहर लाल नेहरू ने एकतरफा युद्धविराम किया। इसी युद्धविराम के कारण पीओके अस्तित्व में है। इसके जिम्मेदार जवाहर लाल नेहरू हैं।

अमित शाह ने सिंधु जल संधि के फैसले की याद दिलाई, जिसमें 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को दिया गया था। उन्होंने 1965 में जीते हाजी पीर को वापस लौटाने और 1971 की जीत के बाद शिमला समझौते में पीओके को नहीं मांगने पर कांग्रेस को घेरा। शाह ने देश के विभाजन और पाकिस्तान बनने पर भी कांग्रेस को घेरा और कहा कि अगर कांग्रेस ने देश के विभाजन को स्वीकार नहीं किया होता, तो आतंकवाद की समस्या इतनी गंभीर न होती ।

गृह मंत्री ने ‘पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि पूर्व पीएम नेहरू ने 30 हजार वर्ग किमी ‘अक्साई चिन’ चीन को दे दिया। अमित शाह यहीं नहीं रुके। उन्होंने नेहरू के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का प्रस्ताव दिया था, लेकिन नेहरू ने इसे ठुकरा दिया। कांग्रेस की गलतियां गिनाने में शाह पूरे रौ में थे । उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा 2002 में लाए गए पोटा कानून का जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस पर इसके विरोध करने का आरोप लगाया और पूछा कि ‘पोटा’ रोककर वो किसे बचाना चाहती थी? ‘

उन्होंने कहा कि पोटा’ तो आतंकवादियों के खिलाफ था। वोट बैंक के लिए ‘पोटा’ रोककर कांग्रेस ने आतंकियों को बचाने का काम किया। शाह ने आंकडों के जरिए बताया कि 2014 से 2025 तक उनकी सरकार के कार्यकाल में एक भी आतंकी घटना नहीं हुई। उन्होंने 2004 से 2014 की तुलना 2015 से 2025 के बीच में की और एक एक आंकडों के जरिए बता दिया कि कैसे देश में सुरक्षा हालात बेहतर है ।

वहीं, कश्मीर में धारा 30 हटने के बाद की सुरक्षा स्थिति के बेहतर होने के बारे में भी शाह ने सदन और देश को जानकारी दी । कुल मिलाकर लोकसभा में इस चर्चा में शाह ने न केवल कांग्रेस को उसकी गलतियां याद दिलायी बल्कि पहलगाम आतंकी हमले के जिम्मेदारों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की खुशखबरी भी देश को दी ।

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