P?c1=2&c2=41463588&cv=3.9
Friday, April 17, 2026
No menu items!
spot_img
Homeमध्यप्रदेशहाईकोर्ट में कराधान घोटाले का नया मोड़, शासन से मांगा जवाब –...

हाईकोर्ट में कराधान घोटाले का नया मोड़, शासन से मांगा जवाब – SDOP केएस द्विवेदी पर गुमराह करने का आरोप

मध्य प्रदेश कराधान घोटाले में हाईकोर्ट ने शासन से पूछा, एसडीओपी कृपाशंकर द्विवेदी द्वारा गलत हलफनामा देने पर क्या हुई कार्रवाई।

रीवा/अरविन्द तिवारी/खबर डिजिटल। 12 करोड़ के कराधान घोटाले में तत्कालीन एसडीओपी मनगवां केएस द्विवेदी ने हाईकोर्ट को किया गुमराह, कोर्ट को गुमराह करने पर तत्कालीन SDOP मनगवां केएस द्विवेदी पर क्या कार्यवाही की गई हाईकोर्ट ने शासन से मागा जबाब, कराधान घोटाले में शासन द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन 141/2023 में गलत जानकारी देने के लिए SDOP मनगवां कृपाशंकर द्विवेदी पर क्या कार्यवाही हुई हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी// कराधान घोटाले के मास्टरमाइंड राजेश सोनी और अन्य अरिपियों को बचाने के लिए तत्कालीन एसडीओपी मनगवां ने हाईकोर्ट को भेजा था गलत एफिडेविट// अपने जवाब में एसडीओपी मनगवां कृपाशंकर द्विवेदी ने कहा था राजेश सोनी के ऊपर मनगवां थाने में नहीं दर्ज है कोई FIR // गौरतलब है तत्कालीन एसडीओपी मनगवां कृपाशंकर द्विवेदी अब हो चुके हैं रिटायर// एडिशनल जिला सीईओ एबी खरे और एसडीओपी कृपाशंकर द्विवेदी की वजह से शासन को लगाना पड़ा था रिव्यू पिटिशन// अब देखना यह होगा रिटायरमेंट के बाद केएस द्विवेदी के विरुद्ध क्या बनता है आपराधिक प्रकरण // एसडीओपी केएस द्विवेदी के ऊपर हाईकोर्ट को गुमराह किए जाने और गलत रिपोर्ट भेजे जाने का है आरोप//

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित कराधान घोटाले में अब एक नया मोड़ आ गया है। गौरतलब है की मध्य प्रदेश की 1148 पंचायतों में वर्ष 2018-19 के दौरान लगभग 300 करोड़ की 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट की राशि को इन पंचायतों के सीधे एकल खाते में भेजकर ग्राम पंचायतों द्वारा फर्जी कर लगाना बताया जाकर राशि आवंटित कर विकास कार्यों के लिए एक खाका तैयार किया गया था। लेकिन जैसा कि हमेशा ही ग्रामीण विकास में होता आया है यह राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। जिसकी शिकायत हुई, और शिकायत के बाद जांचें भी हुई और कलेक्टर कमिश्नर की जांच में बकायदा रीवा जिले की गंगेव जनपद की 38 ग्राम पंचायतों में भेजी गई इस राशि का बंदरबाट भी प्रमाणित पाया गया।

कमिश्नर और कलेक्टर की जांच में दोषी पाए जाने के बाद तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेडे द्वारा मनगवां थाने में प्राथमिकी क्रमांक 470/2020 दर्ज करवाई गई जिसमें तीन मुख्य आरोपी लिपिक राजेश सोनी, रोजगार सहायक प्रतिभा सिंह एवं शिव शक्ति मटेरियल सप्लायर के प्रोपराइटर नागेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया। मामले की जांच और छानबीन के बाद प्रकरण में चालान पेश हुआ। बाद में राजेश सोनी की गिरफ्तारी हुई जिसमें वह 7 महीने जेल में रहा। जमानत पर छूटने के बाद अब मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की रीवा अदालत में चल रहा है।

SDOP मनगवां कृपा शंकर द्विवेदी ने हाईकोर्ट जबलपुर को किया गुमराह, भेजा गलत हलफनामा

पर इस मामले में खास बात यह है कि जब आरोपियों के द्वारा अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट जबलपुर में अपनी याचिकाएं दायर की गई तो पुलिस से रिपोर्ट तलब की गई। तत्समय मनगवां एसडीओपी कृपाशंकर द्विवेदी के द्वारा राजेश सोनी को बचाते हुए हाईकोर्ट को ही गलत जानकारी प्रस्तुत कर दी गई और बकायदा अपना गलत एफिडेविट भी दे दिया गया। तत्कालीन एसडीओपी कृपाशंकर द्विवेदी के द्वारा बताया गया की राजेश सोनी और उक्त दो आरोपियों के विरुद्ध मनगवां थाने में कोई एफआईआर ही दर्ज नहीं है। जिसका फायदा उठाते हुए सभी पंचायत एवं इन तीन मुख्य आरोपियों को हाईकोर्ट जबलपुर से राहत मिल गई।

मामला संज्ञान में आते ही सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी एवं अधिवक्ता संजय पांडेय के द्वारा पुनः शिकायत की गई और उल्लेख किया गया की तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी एबी खरे एवं तत्कालीन एसडीओपी मनगवां कृपाशंकर द्विवेदी के द्वारा मिलीभगत कर आरोपियों को बचाते हुए साजिश की गई थी जिसमें उनके द्वारा गलत रिपोर्ट और गलत जानकारी हाईकोर्ट को प्रस्तुत की गई। जिसका फायदा आरोपियों को मिल गया। प्रशासन ने शिकायत पर संज्ञान लिया और पुनः हाईकोर्ट जबलपुर में रिव्यू पिटीशन क्रमांक 141 वर्ष 2023 दायर करते हुए कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुनः प्रकरण चलाये जाने और दोषियों पर कार्यवाही करने के लिए याचिका दायर की।

हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने शासन से तलब की रिपोर्ट

मामला चलता रहा और अभी हाल ही में एक सुनवाई के दौरान दिनांक 14 अगस्त 2025 को जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने अब शासन से जवाब मांगा है कि जिस प्रकार तत्कालीन एसडीओपी मनगवां कृपाशंकर द्विवेदी के द्वारा हाईकोर्ट को गुमराह करते हुए गलत और भ्रामक जानकारी भेजी जाकर आरोपियों को बचाए जाने का प्रयास किया गया था उसके लिए शासन स्तर से कृपाशंकर द्विवेदी के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई है?

अब तक प्राप्त जानकारी में इस विषय पर शासन के द्वारा हाईकोर्ट को कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। गौरतलब है की तत्कालीन एसडीओपी मनगवां कृपाशंकर द्विवेदी अब सेवानिवृत हो चुके हैं। लेकिन एसडीओपी के द्वारा जो कृत्य किए गए उससे शासन की लगभग 12 करोड़ के गबन में सभी आरोपियों को राहत मिल गई थी। यदि यह मामला शिवानंद द्विवेदी और संजय पांडेय के द्वारा पुनः नहीं उठाया जाता और लड़ाई नहीं लड़ी जाती तो जाहिर है इस पर भी पर्दा डाला जा चुका था और अधिकारियों की मिली भगत से आरोपियों को क्लीन चिट मिल चुकी थी।

एसडीओपी कृपाशंकर द्विवेदी और एडिशनल सीईओ एबी खरे के द्वारा प्रस्तुत किए गए अपने हलफनामे के आधार पर तत्कालीन जस्टिस नंदिता दुबे के द्वारा सभी आरोपियों को राहत भी दे दी गई थी। अब जब यह मामला पुनः एक बार उठा है तो अब देखना यह है की इन भ्रष्टाचारियों और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने और बढ़ाने के लिए एसडीओपी मनगवां कृपाशंकर द्विवेदी और एडिशनल को एबी खरे के विरुद्ध क्या कार्यवाही की जाती है।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

लेटेस्ट