Jal Ganga Samvardhan Abhiyan 2025: भारतवर्ष में जल का महत्व केवल जीवन के लिए आवश्यक संसाधन के रूप में ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है। विशेषकर नदियों को भारत में माँ के रूप में पूजा जाता है। गंगा, नर्मदा जैसी नदियाँ जीवनदायिनी कही जाती हैं। ऐसे समय में जब जल संकट एक वैश्विक समस्या बन चुका है ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘जल गंगा अभियान’ के माध्यम से जल संरक्षण को एक जनआंदोलन में बदलने का सराहनीय कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कार्यशैली हमेशा से धरातलीय पहल और जनसहभागिता पर आधारित रही है। उनका मानना है कि “जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।” इसी विचारधारा को मूर्त रूप देते हुए उन्होंने ‘जल गंगा अभियान’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य प्रदेश में जल स्रोतों का पुनर्जीवन, जल स्तर में सुधार और वर्षा जल का संरक्षण है।
‘जल गंगा अभियान’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन है। इस अभियान के मुख्य उद्देश्य जल स्रोत तालाब, कुंए, बावड़ियां, और नदियों की सफाई और पुनरुद्धार करना है। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना – हर घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य बनाना है। स्कूली बच्चों, युवाओं, किसानों और महिलाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाना के साथ ‘श्रमदान’ के माध्यम से जल निकायों की सफाई और गहरीकरण कार्य में जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।
खंडवा जिला इस अभियान की सफलता का एक चमकता उदाहरण बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में खंडवा पूरे प्रदेश में जल गंगा अभियान में नंबर 1 स्थान पर रहा है। खंडवा में कई सूख चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया गया, जिससे किसानों और ग्रामीणों को सिंचाई व पेयजल की बड़ी राहत मिली। जिले में 300 से अधिक जल संरचनाओं का गहरीकरण और सफाई कार्य सामूहिक श्रमदान और प्रशासनिक सहयोग से पूरा किया गया। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को तेजी से अपनाया गया, विशेषकर शासकीय भवनों और विद्यालय परिसरों में। बालकों, युवाओं और स्वयंसेवकों की सहभागिता ने इसे एक जनांदोलन का रूप दे दिया।
प्रशासन और आमजन के संयुक्त प्रयासों से खंडवा ने जल संरक्षण के मॉडल जिले के रूप में स्वयं को स्थापित किया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के अथक प्रयास और जनसहयोग के बलबूते अब तक प्रदेश भर में 5,000 से अधिक पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया गया है। हर ग्राम पंचायत में कम से कम एक जल संरचना का निर्माण या पुनरुद्धार किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट में भारी कमी आई है। शहरी क्षेत्रों में नए भवन निर्माण के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया है। हजारों स्वयंसेवी संगठन, छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई है। ‘जल गंगा’ पोर्टल के माध्यम से सभी कार्यों की निगरानी और जानकारी आम जनता के लिए उपलब्ध कराई गई है, जिससे पारदर्शिता और सहभागिता में इजाफा हुआ है।
‘जल ही जीवन है’ का संदेश केवल नारा नहीं, बल्कि व्यवहार में लाना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिस प्रकार जल गंगा अभियान को एक सशक्त और जनआधारित योजना में बदला है, वह संपूर्ण देश के लिए प्रेरणास्रोत है। इस अभियान की सफलता इस बात की पुष्टि करती है कि जब नेतृत्व दूरदर्शी हो और जनता साथ हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। मध्यप्रदेश अब केवल ‘माँ नर्मदा’ का प्रदेश नहीं, बल्कि जल संरक्षण में अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है – और इसके केंद्र में हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच और ठोस कार्य।


