यह अध्ययन दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोलकाता, गुवाहाटी, मुंबई और अहमदाबाद सहित आठ शहरों में किया गया
मुंबई : गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के अग्रणी फर्नीचर ब्रांड, ‘इंटीरियो बाय गोदरेज’ ने आज ‘मोमेंट्स दैट मैटर’ (MTM) नामक एक अध्ययन रिपोर्ट जारी किया। यह अध्ययन इस बात की गहराई से पड़ताल करता है कि घर और कार्यस्थल के दैनिक अनुभव किस प्रकार आधुनिक भारतीय उपभोक्ताओं के भावनात्मक स्वास्थ्य, आपसी जुड़ाव और सुख-सुविधाओं को नया स्वरूप दे रहे हैं। शोध के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि आज के परिवेश में भारतीय उपभोक्ता अपने परिवेश (लिविंग स्पेस)के साथ किस तरह जुड़ते हैं, इसमें निद्रा, पाक-कला (कुकिंग) और एकांत के व्यक्तिगत क्षण केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
लखनऊ में किए गए अध्ययन रिपोर्ट ‘मोमेंट्स दैट मैटर’ (MTM) यह उजागर करता है कि घरों में भोजन और रसोई से जुड़े अनुभव किस तरह रोज़मर्रा के पारिवारिक रिश्तों को नई गहराई और अर्थ दे रहे हैं। लखनऊ के 92% उत्तरदाताओं का मानना है कि रात का भोजन वह समय होता है, जब पूरा परिवार सबसे ज्यादा खुशी और आत्मीयता के साथ एकजुट होते हैं-यह दर्शाता है कि भोजन का समय वास्तव में घर की भावनात्मक धड़कन बन गया है। इसी क्रम में, 90% लोगों का कहना है कि सप्ताहांत (वीकेंड)पर परिवार और बच्चों के साथ मिलकर खाना बनाना सिर्फ एक गतिविधि नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने वाला एक यादगार अनुभव है। यह स्पष्ट करता है कि रसोई अब केवल एक कामकाजी जगह नहीं रही, बल्कि साथ रहने, संवाद करने और परंपराओं को जीवंत रखने का केंद्र बन चुकी है। वहीं, 65% उत्तरदाताओं ने अकेले खाना पकाने को मानसिक सुकून और आत्मिक संतुलन देने वाला अनुभव बताया है। यह संकेत देता है कि रसोई केवल सामूहिक जुड़ाव का ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत शांति और आत्म-नवीनीकरण का भी एक महत्वपूर्ण स्थल बन चुकी है।
इन निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, डॉ. देव नारायण सरकार, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ कंज्यूमर बिजनेस (B2C), इंटरियो बाय गोदरेज ने कहा, ‘मोमेंट्स दैट मैटर’ केवल एक शोध नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा दृष्टिकोण है, जो बताता है कि भारतीय उपभोक्ता भविष्य के घर और कार्यस्थल के डिजाइनों को किस रूप में देखते हैं। आज की भागदौड़ भरी दुनिया में घर और दफ्तर अब केवल भौतिक स्थान नहीं रह गए हैं, बल्कि वे मानसिक सुकून, आपसी मेलजोल और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के केंद्र बन गए हैं। यह अध्ययन भारतीयों और उनके परिवेश (लिविंग स्पेस)के बीच बदलते रिश्तों को समझने की गोदरेज इंटीरियो की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। हमारा लक्ष्य भारतीयों के रोजमर्रा के परिवेश के अनुभव को बदलने में अग्रणी भूमिका निभाना है, ताकि हम ऐसा फर्नीचर बना सकें, जो आधुनिक उपभोक्ताओं के अनमोल क्षणों को और भी खास बना सके, जो वास्तव में उनके लिए मायने रखते हैं।”
अध्ययन के निष्कर्ष स्पष्ट करते हैं कि भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी के दबावों के बीच भारतीय घर अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि एक मजबूत भावनात्मक आधार (इमोशनल एंकर) बन चुके हैं- जहां व्यक्ति को संतुलन, सुकून और अपनेपन का अहसास मिलता है। घर का ‘बेडरूम’ इस भावनात्मक संरचना का केंद्र बनकर उभरा है, जहां 90% उत्तरदाताओं ने इसे आराम, ताजगी और विश्राम से जोड़ा है। वहीं, 54% लोगों के लिए घर का सबसे सुखद पल अपने बिस्तर पर सोना है, जो यह दर्शाता है कि नींद, परिचित माहौल और भावनात्मक सुरक्षा के बीच एक गहरा और भरोसेमंद रिश्ता मौजूद है।
इसी तरह, रसोईघर (किचन) अब महज़ खाना पकाने की जगह नहीं रह गया है, बल्कि घर का भावनात्मक केंद्र बनकर उभरा है, जहां 97% लोग अकेले या परिवार के साथ भोजन बनाने को मानसिक सुकून, सजगता और आपसी जुड़ाव के अनुभव से जोड़ते हैं। वहीं, लिविंग और डाइनिंग रूम आज भी घर की सामाजिक धड़कन बने हुए हैं-जहां भोजन का समय सिर्फ खाने का नहीं, बल्कि रिश्तों को संवारने का सबसे जीवंत और आनंदमय अवसर होता है, जो बातचीत, हंसी और अपनापन के जरिए परिवार को और करीब ले आता है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि शहरी जीवन में ‘बालकनी’ एक शांत ठिकाने के रूप में उभरी है। हर चार में से तीन उत्तरदाताओं ने इसे एक ऐसे शांतिपूर्ण स्थान के रूप में वर्णित किया है, जो शहर की भागदौड़ के बीच सुकून और एक नया नजरिया प्रदान करता है। 53% लोगों का मानना है कि बालकनी में बिताए गए सुबह के शुरुआती पल उन्हें दिन की शुरुआत सकारात्मकता के साथ करने में मदद करते हैं।
कार्यस्थल के संदर्भ में, अध्ययन यह रेखांकित करता है कि अनौपचारिक बातचीत, कैफे ब्रेक और साथ में साझा किया गया लंच जैसे दिखने में साधारण पल ही टीमों के बीच भरोसे, तालमेल और अपनेपन की असली नींव तैयार करते हैं। यही सहज जुड़ाव किसी ऑफिस को महज कार्यस्थल नहीं, बल्कि जीवंत मानवीय रिश्तों का केंद्र बना देता है। इसके साथ ही, सुव्यवस्थित और सोच-समझकर डिजाइन किए गए ऑफिस स्पेस तथा पहले दिन का स्वागतपूर्ण अनुभव कर्मचारियों में आत्मविश्वास, सहजता और प्रेरणा जगाने के साथ-साथ संगठन के प्रति विश्वास को भी गहराई से मजबूत करते हैं।


