सागर: भारत में बढ़ती वित्तीय जटिलताओं, स्वास्थ्य जोखिमों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस की नवीनतम देशव्यापी स्टडी ‘अ-निश्चित इंडेक्स 2.0’ के परिणाम सामने आए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, सागर का ‘अ-निश्चित इंडेक्स’ 77 दर्ज किया गया है, जो कि राष्ट्रीय औसत (79) और वेस्ट ज़ोन के औसत (81) से कम है। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की तुलना में सागर के निवासियों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता का स्तर थोड़ा कम है और वे अपेक्षाकृत अधिक निश्चिंत महसूस करते हैं।
वैश्विक संघर्ष और जीवनशैली तनाव प्रमुख चिंताएं भले ही सागर का कुल स्कोर कम रहा हो, लेकिन शहर की चिंताओं का स्वरूप काफी विशिष्ट है। सागर के निवासियों के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में वैश्विक युद्धों का घरेलू अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, महंगाई, और भविष्य में किसी नए वायरस प्रकोप की आशंका शामिल है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर दीर्घकालिक शांति और सुरक्षा को लेकर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। व्यक्तिगत स्तर पर, सोशल मीडिया का प्रभाव, जीवनशैली से जुड़ा तनाव और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका मानसिक दबाव को बढ़ा रही है।
वित्तीय सुरक्षा का अनिश्चितता पर प्रभाव स्टडी में यह स्पष्ट हुआ है कि वित्तीय सुरक्षा और निवेश विविधीकरण का अनिश्चितता को कम करने में सीधा हाथ है। डेटा के अनुसार:
- सामाजिक-आर्थिक स्तर: एसईसी-सी (SEC-C) वर्ग में अनिश्चितता सबसे अधिक (81) रही, जबकि एसईसी-ए (SEC-A) वर्ग में यह सबसे कम (71) दर्ज की गई।
- बीमा और निवेश: जिन नागरिकों के पास चार या अधिक बीमा पॉलिसी हैं, उनमें अनिश्चितता का स्तर घटकर 74 रह गया। वहीं, तीन या अधिक निवेश साधनों में पैसा लगाने वालों में अनिश्चितता का स्कोर सबसे कम (68) पाया गया।
जनसांख्यिकीय विश्लेषण सागर में अनिश्चितता का स्तर लिंग आधारित समान रहा, जहाँ पुरुष और महिला दोनों का स्कोर 77 रहा। आयु वर्ग की बात करें तो जेनरेशन-ज़ेड (Gen-Z) में सबसे कम अनिश्चितता (75) देखी गई, जबकि जेनरेशन-एक्स और बेबी बूमर्स में यह थोड़ा अधिक रही। जीवन के पड़ावों के आधार पर भी सीमित अंतर पाया गया, जहाँ बच्चों वाले विवाहित जोड़ों में अनिश्चितता का स्कोर 78 रहा।
रिसर्च ओवरव्यू यह स्टडी 3,583 प्रतिभागियों के क्वांटिटेटिव सर्वे और 21 गहन इंटरव्यू पर आधारित है। यह करियर, स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सुरक्षा जैसे 11 मापदंडों पर 49 कथनों को मैप करती है ताकि भारतीयों की बढ़ती चिंताओं का व्यापक नज़रिया मिल सके। निष्कर्षों से स्पष्ट है कि जैसे-जैसे बाहरी जोखिम (जैसे भू-राजनीति और बीमारी) बढ़ रहे हैं, भविष्य के लिए एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच और योजना बनाना नागरिकों को दीर्घकालिक आत्मविश्वास देने के लिए अनिवार्य हो गया है।


