नई दिल्ली : नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज से शुरू हुए ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज करा रहा है। ग्लोबल साउथ के इस सबसे बड़े एआई आयोजन में मंत्रालय ने “एआई फॉर इनक्लूसिव डेवलपमेंट” थीम पर आधारित एक विशेष पवेलियन (बूथ संख्या 3F 26 और 3F 20) स्थापित किया है। इस पहल का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग रोजगार विस्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि आजीविकाओं को सशक्त बनाने और कार्यबल को ‘एआई-रेडी’ करने के लिए कर रहा है।
स्किलिंग का त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क: एआई में, एआई के साथ और एआई के लिए मंत्रालय ने अपने विजन को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है, जिसका प्रदर्शन पवेलियन में लाइव डैशबोर्ड और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन के माध्यम से किया जा रहा है:
- एआई में स्किलिंग: इसके तहत SOAR (स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस) और उद्योग जगत के साथ मिलकर शॉर्ट-ड्यूरेशन ‘नैनो-क्रेडेंशियल्स’ जैसे कोर्स पेश किए जा रहे हैं, ताकि बुनियादी और उन्नत एआई साक्षरता को लोकतांत्रिक बनाया जा सके।
- एआई के साथ स्किलिंग: यहाँ एआई का उपयोग शिक्षा की डिलीवरी और गवर्नेंस में किया जा रहा है। ‘स्किल इंडिया असिस्टेंट’ (SIA) जैसे एआई-पावर्ड सिस्टम छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार करियर मार्गदर्शन और पर्सनलाइज्ड कोर्स के सुझाव दे रहे हैं।
- एआई के लिए स्किलिंग: पवेलियन में गेमिंग डेमोंस्ट्रेशन के जरिए दिखाया गया है कि कैसे एक किसान, इलेक्ट्रीशियन, बुनकर या कंस्ट्रक्शन वर्कर एआई टूल्स का उपयोग करके अपनी उत्पादकता और आय बढ़ा सकते हैं।
“ग्लोबल साउथ में एआई के इस महाकुंभ की मेजबानी करना एक जिम्मेदार और समावेशी भविष्य के प्रति हमारे इरादे को दर्शाता है। हम अपने युवाओं को ऐसे एआई-रेडी कौशल से लैस कर रहे हैं जो सभी के लिए विकास के द्वार खोलेंगे।” — श्री जयंत चौधरी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), MSDE
वैश्विक साझेदारी और भविष्य की राह केंद्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी 17 फरवरी को पवेलियन का दौरा करेंगे और युवा प्रतिभागियों व हितधारकों से संवाद करेंगे। समिट के दौरान वे वैश्विक तकनीकी दिग्गजों और शिक्षाविदों के साथ बैठकें भी करेंगे ताकि डिजिटल इन्क्लूजन और एआई स्किलिंग में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया जा सके। MSDE की यह भागीदारी ‘विकसित भारत’ के उस व्यापक दृष्टिकोण को पुष्ट करती है जहाँ तकनीक मानव-केंद्रित और रोजगार-उन्मुख हो, जिससे देश के जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
