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बजट 2026: FAI ने ‘उर्वरक सुरक्षा’ और आत्मनिर्भर विनिर्माण के लिए माँगा सरकारी कवच

नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियों के बीच, ‘द फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (FAI) ने सरकार से भारत की उर्वरक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए दूरगामी नीतिगत सुधारों का आग्रह किया है। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता के कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, उद्योग ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाने और किसानों के लिए उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

घरेलू विनिर्माण और निवेश पर ध्यान एफएआई ने रेखांकित किया कि रॉक फॉस्फेट, फॉस्फोरिक एसिड और अमोनिया जैसे कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अस्थिरता ने उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है। एफएआई के महानिदेशक, डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि उर्वरक सुरक्षा के लिए किसानों के लिए ‘सामर्थ्य’ और निर्माताओं के लिए ‘वित्तीय व्यवहार्यता’ के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। उद्योग ने स्वदेशी फॉस्फेटिक और पोटाश क्षमता विकसित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन और ‘बैकवर्ड इंटीग्रेशन’ परियोजनाओं के लिए नीतिगत समर्थन की मांग की है।

संतुलित उर्वरीकरण और मृदा स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण मांग यूरिया और पीएंडके (P&K) उर्वरकों के बीच मूल्य विसंगति को दूर करने की है। एफएआई के अनुसार, वर्तमान मूल्य अंतर के कारण एन:पी:के (N:P:K) खपत अनुपात असंतुलित हो गया है, जो मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) के लिए हानिकारक है। उद्योग ने यूरिया को भी पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) ढांचे के तहत लाने और ‘पीएम-प्रणाम’ (PM-PRANAM) जैसी योजनाओं को और प्रभावी बनाने की वकालत की है ताकि वैकल्पिक और जैव-उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा मिल सके।

कराधान और जीएसटी में सुधार की आवश्यकता उद्योग ने वित्त मंत्रालय से ‘इनवर्टेड जीएसटी ड्यूटी स्ट्रक्चर’ (उल्टा जीएसटी ढांचा) की समस्या को सुलझाने का आग्रह किया है, जहाँ इनपुट पर अधिक टैक्स और तैयार उत्पाद पर कम टैक्स के कारण निर्माताओं का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) फंसा रहता है।

प्रमुख बजट मांगें:

  • सीमा शुल्क में कटौती: अमोनिया, फॉस्फोरिक एसिड और सल्फर जैसे कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट।
  • अनुमानित सब्सिडी: एक स्थिर और समयबद्ध सब्सिडी भुगतान तंत्र ताकि विनिर्माताओं की कार्यशील पूंजी (Working Capital) प्रभावित न हो।
  • सर्कुलर इकोनॉमी: कचरे से कंचन (Waste to Wealth) की दिशा में उर्वरक क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा।

एफएआई को उम्मीद है कि इन सुझावों को बजट में शामिल करने से न केवल घरेलू विनिर्माण मजबूत होगा, बल्कि 358 मिलियन टन के रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन की गति को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

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