नई दिल्ली : वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक गंभीर और दूरदर्शी दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच अपनी 90% तेल और गैस जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहना भारत को असुरक्षित बनाता है। अग्रवाल के अनुसार, भारत को आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन को ‘जन-आंदोलन’ बनाने की आवश्यकता है।
संसाधनों की प्रचुरता बनाम लाइसेंस की कमी अनिल अग्रवाल ने भारत की तुलना गुयाना से करते हुए कहा कि भारत के पास 300 बिलियन बैरल समतुल्य हाइड्रोकार्बन संसाधन हैं, जो गुयाना से 30 गुना अधिक हैं। इसके बावजूद, भारत में केवल 20 सक्रिय एक्सप्लोरेशन लाइसेंस हैं, जबकि अमेरिका जैसे देशों की तर्ज पर यहाँ कम से कम 2,000 लाइसेंस होने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक्सप्लोरेशन ही इस उद्योग की आत्मा है और इसी के माध्यम से अमेरिका आयात-निर्भरता से मुक्त हुआ है।
नियामकीय चुनौतियाँ और निवेश का डर अग्रवाल ने ‘भरतपुर पक्षी अभयारण्य’ का उदाहरण देते हुए बताया कि निवेशकों का भरोसा बहुत नाजुक होता है। उन्होंने कहा कि “प्रक्रियाओं की जटिलता, कानूनी नोटिस और लाइसेंस छीने जाने का डर” वैश्विक निवेशकों को भारत से दूर रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तेल और गैस क्षेत्र ने राजकोष में $40 बिलियन का योगदान दिया है, फिर भी इसे PLI (प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) जैसी सरकारी सुरक्षा नहीं मिलती।
भविष्य का रोडमैप: स्टार्टअप्स और भारी निवेश वेदांता चेयरमैन ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की है जहाँ देश भर में हजारों ड्रिलिंग रिग्स संचालित हों और छोटे उद्यमी भी ₹5 करोड़ जैसे निवेश के साथ इस क्षेत्र का हिस्सा बनें। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- भारत आयात की तुलना में आधी लागत पर हाइड्रोकार्बन उत्पादन कर सकता है।
- दुनिया भारत को केवल एक ‘बाजार’ के रूप में देखना चाहती है, न कि ‘उत्पादक’ के रूप में।
- भारत को अपनी जरूरतों के लिए उत्पादन में 10 गुना वृद्धि करनी होगी।


