कट्स इंटरनेशनल (CUTS International) द्वारा जारी एक नए शोध अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि भारत का सेकेंडरी एल्युमिनियम क्षेत्र उच्च इनपुट लागतों के कारण बढ़ते दबाव में है। यह चिंता तब और बढ़ जाती है जब घरेलू एल्युमिनियम की मांग 5.3 मिलियन टन से बढ़कर 2030 तक 8.3 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है।
मध्य प्रदेश में चुनौती का केंद्र
- मध्य प्रदेश, जो भारत के प्रमुख खनिज-समृद्ध राज्यों में से एक है, जबलपुर, सिंगरौली, कटनी और सतना जैसे क्षेत्रों में एल्युमिनियम से जुड़ी महत्वपूर्ण औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र है।
- राज्य में कास्टिंग, फेब्रिकेशन, मशीनिंग और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम प्रोसेसिंग से जुड़े हजारों एमएसएमई सक्रिय हैं, जो रोजगार सृजन, कौशल विकास और तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
शुल्कों के युक्तिकरण की आवश्यकता
कट्स इंटरनेशनल के अध्ययन और उद्योग जगत के नेताओं ने एल्युमिनियम शुल्कों को तर्कसंगत बनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है:
| वर्तमान स्थिति | आवश्यक कदम और प्रभाव |
| मौजूदा शुल्क | प्राथमिक एल्युमिनियम पर 7.5% आयात शुल्क घरेलू कीमतों को ऊँचाई पर बनाए रखता है। |
| मांग और एमएसएमई दबाव | उच्च इनपुट लागत के कारण सेकेंडरी एल्युमिनियम क्षेत्र दबाव में है, जबकि 2030 तक मांग $8.3$ मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है। |
| प्रस्तावित समाधान | प्राथमिक एल्युमिनियम पर शुल्क में कमी करना। |
| प्रस्तावित प्रभाव | यह डाउनस्ट्रीम निर्माताओं को एल्युमिनियम की मांग बढ़ाने में सक्षम बनाएगा, जिससे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। |
नवेंदु के. भारद्वाज, एल्युमिनियम सेकेंडरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ASMA) ने कहा कि एल्युमिनियम मूल्य-वर्धित उत्पाद निर्माण, बुनियादी ढाँचा, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के प्रमुख घटक हैं, और शुल्क में कमी से डाउनस्ट्रीम निर्माताओं को इन क्षेत्रों में विकास पहलों के लिए मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी।
शोध के अनुसार, शुल्क में कमी से प्राथमिक उत्पादकों के लिए घरेलू बाजार, विशेषकर कास्टिंग और फेब्रिकेशन क्लस्टर्स में एमएसएमई को आपूर्ति आर्थिक रूप से व्यवहार्य बन जाएगी। इससे उत्पन्न राजस्व कौशल विकास और सेकेंडरी विनिर्माण में तकनीकी उन्नयन को वित्तपोषित कर सकता है।
निष्कर्ष
अध्ययन का निष्कर्ष है कि शुल्कों का युक्तिकरण भारत के डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम क्षेत्र को सुदृढ़ करेगा, जिससे देशभर के एमएसएमई के लिए अधिक प्रतिस्पर्धात्मकता संभव होगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप औद्योगिक आधार की दिशा में भारत की प्रगति को मजबूती मिलेगी।


