माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख के चुशुल में एनटीपीसी के 3.7 मेगावॉट सोलर प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन किया, जो क्षेत्र में अपनी तरह का पहला सोलर-हाइड्रोजन प्रोजेक्ट है। चुनौतीपूर्ण एवं ज़्यादा उंचाई वाले इलाके के बावजूद यह प्रोजेक्ट आठ महीने की रिकॉर्ड अवधि में शुरू हो गया है।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं
यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से रिमोट आर्मी लोकेशनों में उपयोग किए जा रहे डीज़ल जनरेटर सेट्स को प्रतिस्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
| विशेषता | विवरण |
| स्थान | चुशुल, लद्दाख (ऊंचाई: 4500 मीटर) |
| संयंत्र की क्षमता | 3.7 मेगावॉट सोलर प्लांट। |
| माइक्रोग्रिड डिज़ाइन | हाइड्रोजन को स्टोरेज मीडियम के तौर पर इस्तेमाल करके एक स्टैंड-अलोन माइक्रोग्रिड। |
| पावर आपूर्ति | साल भर दिन के किसी भी समय 200 किलोवॉट विद्युत की आपूर्ति करेगा। |
| तापमान सहनशीलता | -40° सेल्सियस तक के तापमान में काम करने में सक्षम। |
पर्यावरणीय और लॉजिस्टिक्स लाभ
यह परियोजना क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है:
- विकार्बोनीकरण: यह प्रोजेक्ट डीज़ल जनरेटर सेट्स को प्रतिस्थापित करके क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा और स्वच्छ ऊर्जा प्रणाली को बढ़ावा देगा।
- लॉजिस्टिक्स में कमी: स्थानीय उत्पादन और हरित ऊर्जा की उपयोगिता को सशक्त बनाकर यह परियोजना नीचले इलाकों से ईंधन के स्थानान्तरण की ज़रूरत को खत्म कर देगी।
- ऊर्जा दक्षता: इससे उत्पन्न होने वाली हर तीन युनिट पावर से सुदूर इलाकों से एक लीटर डीज़ल लाने की ज़रूरत कम हो जाएगी।
🔌 एनटीपीसी की प्रतिबद्धता
एनटीपीसी की वर्तमान स्थापित क्षमता 84,849 मेगावॉट है और $30.90$ गीगावॉट अतिरिक्त क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें $13.3$ गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है।
- शुद्ध शून्य लक्ष्य: कंपनी 2032 तक 60 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने तथा भारत के शुद्ध शून्य लक्ष्यों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- विविधता: एनटीपीसी ने विद्युत उत्पादन के साथ-साथ ई-मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज, पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज, वेस्ट-टू-एनर्जी, न्युक्लियर पावर और ग्रीन हाइड्रोजन समाधानों में भी प्रवेश किया है।
यह प्रोजेक्ट $4500$ मीटर की ऊंचाई पर मौजूद दुनिया में अपनी तरह का अनूठा प्रोजेक्ट है, जो ऊंचाई वाले इलाकों में डिफेंस सेक्टर के विकार्बोनीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।


