उदयपुर : हिंदुस्तान जिंक का दुनिया का सबसे बड़ा जिंक उत्पादक बनना न केवल एक कंपनी की उपलब्धि है, बल्कि यह भारत के औद्योगिक कायाकल्प की एक प्रेरक गाथा है। वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कंपनी की इस ऐतिहासिक यात्रा पर विचार साझा करते हुए बताया कि कैसे एक समय “पुरानी प्रणालियों और धीमे निर्णयों” वाली मानी जाने वाली संस्था ने दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया। अग्रवाल के अनुसार, इस पूरे परिवर्तन की सबसे मजबूत नींव राजस्थान का वह कार्यबल रहा, जिसकी प्रतिबद्धता और कौशल पर उन्हें कभी संदेह नहीं था। उन्होंने राजस्थान की मिट्टी को महाराणा प्रताप और मीराबाई जैसे महान व्यक्तित्वों की धरती बताते हुए यहाँ के लोगों को सबसे अधिक “जुझारू और मेहनती” करार दिया।
लोगों पर भरोसे और जमीन से जुड़े रहकर किए गए कार्यों का परिणाम आज आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। हिंदुस्तान जिंक के इस सफर ने एक लाख से अधिक रोजगार सृजित किए और उत्पादन क्षमता में दस गुना की अभूतपूर्व वृद्धि की। वर्तमान में यह कंपनी भारत के कुल जिंक उत्पादन में लगभग 75 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। अनिल अग्रवाल ने गर्व के साथ इस बात का भी उल्लेख किया कि जिस भारत में कभी चाँदी का उत्पादन न के बराबर था, आज वह देश हिंदुस्तान जिंक के प्रयासों से हर साल सैकड़ों टन चाँदी का उत्पादन कर रहा है, जो वैश्विक खनिज बाजार में भारत की बढ़ती शक्ति का प्रमाण है।
वित्तीय मोर्चे पर भी कंपनी का योगदान राष्ट्र निर्माण में मील का पत्थर साबित हो रहा है। पिछले वर्ष ही हिंदुस्तान जिंक ने सार्वजनिक कोष में लगभग ₹20,000 करोड़ का योगदान दिया, जिसमें भारत सरकार को मिलने वाला ₹3,600 करोड़ का लाभांश भी शामिल है। इसका अर्थ यह है कि कंपनी के माध्यम से प्रतिदिन लगभग ₹55 करोड़ देश के विकास के लिए वापस जा रहे हैं। अग्रवाल ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि यह सफलता केवल मुनाफे की नहीं, बल्कि राजस्थान के लोगों के स्वाभिमान और जुझारूपन की कहानी है, जो भविष्य में भारत की औद्योगिक क्षमता को और भी ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है।
