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बजट 2026-27: एसबीआई रिसर्च ने 4.2% राजकोषीय घाटे का जताया अनुमान; कर सुधारों के जरिए घरेलू बचत बढ़ाने पर जोर

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने अपनी नवीनतम पूर्व-बजट रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि केंद्र सरकार आगामी बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.2% रख सकती है। यह अनुमान 10.5% से 11% की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि की संभावनाओं पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य मार्च 2031 तक ऋण-जीडीपी अनुपात को घटाकर 50% के स्तर पर लाना है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक साख और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

पूंजीगत व्यय और उधारी का खाका एसबीआई रिसर्च ने सरकार को सुझाव दिया है कि राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) को ₹12 लाख करोड़ से अधिक तक ले जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2027 के लिए केंद्र की शुद्ध उधारी लगभग ₹11.7 ट्रिलियन रहने की उम्मीद है। बुनियादी ढांचे पर यह निवेश न केवल रोजगार सृजित करेगा, बल्कि निजी निवेश (Crowding-in) के लिए भी रास्ता साफ करेगा।

बैंक जमा और कर सुधारों की सिफारिश बैंकिंग क्षेत्र को मजबूती देने के लिए रिपोर्ट ने नीतिगत बदलावों की वकालत की है। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज के कराधान को अन्य निवेश साधनों (जैसे म्यूचुअल फंड) के समान ‘पूंजीगत लाभ कर’ की तर्ज पर लाया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, कर-बचत वाली सावधि जमा (Tax Saving FD) की लॉक-इन अवधि को 5 साल से घटाकर 3 साल करने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि बैंकों के पास फंड की तरलता बनी रहे और वे प्रतिस्पर्धी बने रहें।

व्यक्तिगत आयकर और बीमा क्षेत्र मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए रिपोर्ट में सीमांत कर दरों (Marginal Tax Rates) में कटौती और उपभोग बढ़ाने के लिए जीएसटी ढांचे में सुधार की उम्मीद जताई गई है। बीमा क्षेत्र के लिए, स्वास्थ्य और टर्म इंश्योरेंस के लिए अलग कर कटौती सीमा निर्धारित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही, ‘एनपीएस वात्सल्य’ योजना को सशक्त बनाने हेतु धारा 80CCD(1B) के तहत छूट बढ़ाने का भी सुझाव दिया गया है। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट एक ऐसे संतुलित बजट की परिकल्पना करती है जो विकास और बचत को समान प्राथमिकता देता है।

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