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Homeव्यापारनई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सीरीज: कोर इन्फ्लेशन गिरकर 3.4% पर

नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सीरीज: कोर इन्फ्लेशन गिरकर 3.4% पर

मुंबई : एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की नवीनतम ‘इकोवैप’ रिपोर्ट ने भारत के मुद्रास्फीति परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण सांख्यिकीय बदलाव को रेखांकित किया है। 2024 की नई सीरीज के लागू होने के साथ, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों में व्यापक बदलाव देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 के लिए हेडलाइन इन्फ्लेशन नई सीरीज के तहत 2.75% रही। सबसे उल्लेखनीय सुधार कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) में दर्ज किया गया है, जो पुरानी सीरीज के 4.15% के अनुमान के मुकाबले नई सीरीज में घटकर 3.4% रह गई है।

सोने के वेटेज में कटौती और कोर इन्फ्लेशन पर प्रभाव कोर इन्फ्लेशन में इस गिरावट का प्राथमिक कारण नई पद्धति के तहत वस्तुओं के ‘वेटेज’ (भारांक) में किया गया बदलाव है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, कोर इन्फ्लेशन में कमी का मुख्य श्रेय सोने (Gold) के वेटेज में की गई कटौती को जाता है, जिसे 2012 की पुरानी सीरीज के 1.08% से घटाकर अब 0.62% कर दिया गया है। चूँकि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधा कोर इन्फ्लेशन पर पड़ता था, इस बदलाव ने मुद्रास्फीति के आंकड़ों में सांख्यिकीय ‘शोर’ (Noise) को कम करने में मदद की है।

ग्रामीण और शहरी मुद्रास्फीति का नया स्वरूप नई सीरीज के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मुद्रास्फीति के आंकड़े अब अधिक संतुलित दिख रहे हैं। जहाँ ग्रामीण मुद्रास्फीति 2.73% दर्ज की गई, वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 2.77% रही। खाद्य मुद्रास्फीति 2.13% पर स्थिर रही, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है। हालांकि, ‘पर्सनल केयर’ विभाग में 19.02% की तीव्र वृद्धि देखी गई, जिसका सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में आए उछाल से है।

सटीक नीति निर्धारण में सहायक एसबीआई रिसर्च का निष्कर्ष है कि नई सीरीज भारतीय परिवारों के वर्तमान उपभोग पैटर्न और खर्च करने के आधुनिक तरीकों को बेहतर ढंग से दर्शाती है। आधार वर्ष और वेटेज में यह बदलाव सांख्यिकीय सटीकता को बढ़ाएगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार को महंगाई नियंत्रण के लिए अधिक प्रभावी और व्यावहारिक नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। यह नई पद्धति अर्थव्यवस्था का एक अधिक व्यापक और वास्तविक चित्र पेश करती है जो बदलती वैश्विक आर्थिक स्थितियों के अनुरूप है।

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