नई दिल्ली/बंटी प्रहलाद/खबर डिजिटल/ अमेरिका का बड़े भारी टैरिफ लगाने के बाद भारत और चीन के रिश्ते सुधरते नजर आ रहे हैं। चीन भी अमेरिका की चुनौती और एशिया में पकड़ मजबूत करने के लिए भारत की तरफ देख रहा है। ये दोस्ती कितनी लंबी जाएगी, ये तो कहना मुश्किल है, लेकिन दिवाली की खरीदारी को निकल रहे लोग चीन सामान से तौबा करते नजर आ रहे हैं, वो अबकी बार स्वदेशी पर जोर दे रहे हैं, चाहे वो उत्पाद थोड़े महंगे ही क्यों ना हो।
स्वदेशी आइटम की मची धूम
इस दिवाली को बाजार से चीनी सामान लगभग गायब दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि व्यापारी ही नहीं बेचना चाह रहे। साथ ही साथ खरीदार भी स्वदेशी उत्पादों की मांग कर रहे हैं। जिसके चलते स्वदेशी सामान की बिक्री बढ़ रही है। व्यापारी संगठन कैट का अनुमान है कि इस दिवाली की बिक्री 4.75 लाख करोड़ तक पहुंचेगी, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा। वहीं, कारोबारियों का अनुमान है कि राजधानी दिल्ली में त्यौहारी बिक्री 75 हजार करोड़ तक पहुंच सकती है। दावा है कि इस दिवाली पर चीनी सामान के बजाए स्वदेशी आइटम की धूम मची हुई है।
देसी सामान की तरफ क्यों रुख?
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानि CAIT के पदाधिकारी और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि संगठन ने विभिन्न राज्यों में सर्वे कराया था, जिसमें पता चला कि स्वदेशी आइटम की तरफ लोगों का बढ़ते रुख के दो कारण है। पहला कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वदेशी का आह्वान और उनका ‘वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल ‘ का दृष्टिकोण, जिसमें ग्राहकों का जबरदस्त समर्थन मिला है। इस कारण स्वदेशी की तरफ ग्राहकों का रुख हुआ है।
महंगा होने पर भी सोना-चांदी की खरीददारी
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के पदाधिकारी का कहना है कि कि सोने-चांदी की बढ़ी कीमतों की वजह से मार्केट में तेजी तो आई है। इन्वेस्टर ज्यादातर सोने और चांदी की खरीद कर रहे हैं। अगले साल तक सोने की कीमत में 10 हजार रुपये तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। इसीलिये लोग मां लक्ष्मी का पूजन सोना-चांदी के सामान के साथ करना चाह रहे हैं।
इन स्वदेशी सामानों की ज्यादा मांग
स्वदेशी सामानों में मिट्टी के दीये, मूर्तिया, वॉल हैंगिंग्स, हैंडीक्राफ्ट, पूजन सामग्री, गृह सजावट से लेकर FMCG, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल सामान, बिल्डर्स हार्डवेयर, ऑटोमोबाइल, कपड़ा और टेपेस्ट्री, रेडीमेड वस्त्र, फर्नीचर, खिलौने, मिठाई, पर्सनल केयर प्रोडक्ट, किचनवेयर और बर्तन तक शामिल हैं। लगभग हर सेक्टर में स्वदेशी सामानों की बंपर बिक्री की संभावना है, जिसमें भारतीय कारीगर, निर्माता और व्यापारी प्रमुख भूमिका निभा रहे है।


