सतना/रमाशंकर त्रिपाठी/खबर डिजिटल/ ‘बाबू’ वो शब्द जो किसी व्यक्ति के नाम की पहचान बन गया, ‘शंकरलाल तिवारी’, वो नाम जिनकी बात के बाद, ‘बात’ ‘विषय’ ‘मामला’ समाप्त। प्रकृति ने बाबू को एक अलग ही गला देकर रखा था, हर कोई आवाज को पहचान जाता और बाबू जब बोलते तो सबको सुनना ही पड़ता था। 2003 से 2018 तक सतना की जनता ने उन्हें विधायक पद का ताज देकर रखा था। राजधानी दिल्ली में महीनों से इलाज चल रहा था, रविवार 12 अक्टूबर 2025 दोपहर सतना के लिए दुखद खबर आ गई, और बाबू यानि शंकरलाल तिवारी का देवलोक गमन हो गया। ॐ शांति!
सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि दी, जिसमें उन्होंने लिखा कि वरिष्ठ भाजपा नेता एवं सतना विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री शंकरलाल तिवारी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!
दिवंगत शंकरलाल तिवारी का सियासी सफर
स्वर्गीय शंकरलाल रामप्रताप तिवारी का जन्म सतना में 8 अप्रैल, 1953 को हुआ था, और रविवार 12 अक्टूबर 2025 को 72 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके तीन पत्र और दो पुत्रियां है। वो इंडरमीडिएट तक पढ़े थे। उनका व्यवसाय कृषि, पत्रकारिता रहा। उन्हें अभिरूचि लेखन, गीत-गजल, बैडमिन्टन का बड़ा शौक था। वे बाल्यकाल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक थे। छात्र जीवन में विद्यार्थी परिषद के संभागीय प्रभारी और शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सतना के छात्र संघ के सचिव रहे। छात्र आंदोलन में ढाई महीने की जेल यात्रा की। 1969 से भारतीय जनसंघ के सदस्य बने। शंकरलाल तिवारी 1972-73 में भारतीय युवा संघ के प्रदेश सचिव और 1973-75 में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए।1975 में जे. पी. के समग्र क्रांति आंदोलन के लिए गठित छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के प्रांतीय सह संयोजक रहते तीन माह की जेल यात्रा की। शिमला समझौते के विरोध में एक सप्ताह की जेल काटी। आपातकाल में 19 माह मीसाबंदी थे। वे भाजपा के जिला महामंत्री भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मंत्री. श्रमजीवी पत्रकार संघ, सतना के जिला महामंत्री रहे थे। दैनिक वीर अर्जुन, दिल्ली एवं दैनिक युगधर्म, जबलपुर के ब्यूरो चीफ रहे। ‘बेधड़क भारत’ समाचार पत्र का संपादन एवं प्रकाशन किया। 1984-88 में भाजपा के जिला महामंत्री, भारतीय किसान मोर्चा के संभागीय प्रभारी भी रहे। विभिन्न जन आंदोलनों में तीन सौ से अधिक बार जेल यात्रा की। सन् 2003 में पहली बार विधान सभा सदस्य निर्वाचित हुए, जोकि 2018 तक विधानसभा के सदस्य रहे।


