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Friday, April 17, 2026
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केंद्रीय बजट 2026: वित्तीय क्षेत्र ने पूंजीगत राहत और क्रेडिट प्रवाह को मजबूत करने की मांग की

जैसे-जैसे 1 फरवरी 2026 की बजट तारीख नजदीक आ रही है, भारत का वित्तीय क्षेत्र सरकार से ऐसे नीतिगत हस्तक्षेपों की उम्मीद कर रहा है जो पूंजीगत बाधाओं को दूर करें और बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) की स्थिति में सुधार करें। उद्योग विशेषज्ञों और ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि भारत की आर्थिक गति को बनाए रखने के लिए इस बजट में पूंजीगत व्यय (Capex) में 12-15% की वृद्धि का लक्ष्य रखा जा सकता है, जो लगभग ₹12.5 – ₹13.1 ट्रिलियन तक पहुँच सकता है।

गुणवत्तापूर्ण ऋण और समावेशी विकास पर जोर गोदरेज कैपिटल के एमडी और सीईओ, मनीष शाह ने बजट की दिशा पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि अब समय केवल ऋण वितरण (Credit Expansion) बढ़ाने का नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, सुलभता और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने का है। उनके अनुसार:

“भारत अब वित्तीय पैठ के अगले चरण में है। बजट 2026 घरेलू नकदी को गहरा करने और क्रेडिट गारंटी व को-लेंडिंग (सह-ऋण) जैसी जोखिम-साझाकरण प्रणालियों को मजबूत करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”

शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि वित्त को परिवारों, एमएसएमई (MSMEs) और उभरते उद्यमियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप अधिक किफायती और लचीला बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि रियल एस्टेट बिक्री से प्राप्त राशि को कम पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) दरों पर वित्तीय साधनों में निवेश करने की अनुमति देने से सिस्टम में रुकी हुई नकदी (liquidity) अनलॉक हो सकती है।

एमएसएमई और बैंकिंग क्षेत्र की मुख्य अपेक्षाएं:

  • क्रेडिट गारंटी योजना: एमएसएमई के लिए CGTMSE जैसी योजनाओं के विस्तार और ऋण सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने की मांग।
  • डिजिटल लेंडिंग: ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ और डिजिटल बुनियादी ढांचे के माध्यम से कैश-फ्लो आधारित ऋण को बढ़ावा देना।
  • कर सुधार: स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए अनुपालन (Compliance) को सरल बनाना और टीडीएस (TDS) दरों को तर्कसंगत बनाना।
  • राजकोषीय अनुशासन: विशेषज्ञों को उम्मीद है कि सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.2-4.3% के स्तर पर लाने का लक्ष्य रखेगी, जिससे वैश्विक बाजारों में भारत की साख मजबूत होगी।

वित्तीय क्षेत्र एक ऐसे भविष्य के लिए तैयार ईकोसिस्टम की मांग कर रहा है जहाँ नीतिगत निरंतरता बनी रहे और समावेशी विकास को समर्थन मिले। उद्योग जगत को उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाने वाला यह बजट टिकाऊ ऋण प्रणालियों और नई तकनीकों जैसे AI और क्वांटम कंप्यूटिंग को अपनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

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