नई दिल्ली : ‘विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (11 फरवरी) की पूर्व संध्या पर, भारत की प्रमुख प्राकृतिक संसाधन कंपनी वेदांता लिमिटेड ने विविधता और समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक घोषणा की है। कंपनी ने अपने STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को 50% तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में, वेदांता की नई नियुक्तियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 35% से अधिक हो चुकी है, जो पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान माने जाने वाले खनन और ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव है।
धातु और खनन क्षेत्र में जेंडर रूढ़ियों को तोड़ती पहल वेदांता की गैर-कार्यकारी निदेशक और हिंदुस्तान जिंक की चेयरपर्सन, सुश्री प्रिया अग्रवाल हेब्बार के नेतृत्व में कंपनी ने कई ‘प्रथम’ उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत में पहली बार महिलाओं को भूमिगत खदानों (Underground Mines) में तैनात करने से लेकर पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित एल्युमीनियम प्रोडक्शन लाइन तक, वेदांता ने यह साबित किया है कि तकनीक और साहस के संगम से कोई भी क्षेत्र दुर्गम नहीं है। हेब्बार के अनुसार, “जब लड़कियां इन रास्तों को देखती हैं, तो वे न केवल STEM चुनती हैं, बल्कि नेतृत्व करना भी चुनती हैं।”
समावेशी कार्यस्थल और भविष्य के लिए तैयार नीतियां डिजिटल बदलाव और स्वचालन (Automation) ने कार्यस्थलों को महिलाओं के लिए अधिक सुलभ बनाया है। वेदांता ने महिला प्रतिभाओं को बनाए रखने (Retention) के लिए कई प्रगतिशील नीतियां लागू की हैं:
- चाइल्डकेयर विश्राम: देखभाल की जरूरतों के लिए एक साल का विशेष अवकाश।
- ‘नो-क्वेश्चन-आस्क्ड’ WFH: महीने में एक दिन बिना किसी सवाल के घर से काम करने की सुविधा।
- जीवनसाथी की नियुक्ति: करियर में निरंतरता के लिए पति-पत्नी दोनों को एक ही स्थान पर नियुक्ति का अवसर।
- ESOPs: महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने के लिए स्टॉक ऑप्शन की सुविधा।
जमीनी स्तर पर प्रभाव: समुदायों से संस्थानों तक वेदांता का प्रभाव केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है। कंपनी के सामाजिक कार्यक्रमों ने अब तक 50,000 से अधिक लड़कियों को STEM शिक्षा से जोड़ा है। राजस्थान में ‘ऊंची उड़ान’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पहली पीढ़ी की छात्राएं अब देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों (जैसे MNIT) में प्रवेश पा रही हैं। ओडिशा की खदानों से लेकर राजस्थान के तेल क्षेत्रों तक, कोयल चटर्जी और सुलक्षणा जैसी महिला विशेषज्ञ डेटा-आधारित नवाचारों के जरिए भारत की औद्योगिक वृद्धि का नेतृत्व कर रही हैं।
