नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के अवसर पर वेदांता लिमिटेड की सब्सिडियरी हिंदुस्तान ज़िंक ने राजस्थान के उदयपुर वन विभाग के साथ बाघदर्रा मगरमच्छ संरक्षण रिजर्व के पुनरुत्थान के लिए ₹5 करोड़ के निवेश के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह परियोजना 400 हेक्टेयर में फैले रिज़र्व क्षेत्र को दलदली मगरमच्छों के लिए उपयुक्त आवास में बदलने की दिशा में एक अहम कदम है। इसमें वृक्षारोपण, जल संरक्षण ढांचे, इको-सेंसिटिव ज़ोन जैसे शैक्षणिक प्रदर्शनी, पैदल पथ और आश्रय गृहों का निर्माण शामिल है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 15 “धरती पर जीवन” और 2025 की थीम “प्रकृति और सतत विकास के साथ तालमेल” के अनुरूप है।
वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी वेदांता
वेदांता की पशु कल्याण इकाई द एनिमल केयर ऑर्गनाइज़ेशन (TACO), आधुनिक पशु चिकित्सालयों, त्यागे गए जानवरों के लिए शरणस्थलों और बंध्यीकरण कार्यक्रमों के माध्यम से सक्रिय है। इसके तहत हरियाणा, राजस्थान और असम के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों – रणथंभौर, रामगढ़ विषधारी और काजीरंगा में गैंडे और बाघ संरक्षण के लिए भी साझेदारियां की गई हैं।
विविध राज्यों में जैवविविधता संरक्षण की पहलें
- राजस्थान: चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर के पास 16 हेक्टेयर बंजर ज़मीन को ग्रीनबेल्ट में बदला जा रहा है।
- गोवा: सेसा गोवा की पहल से 200 हेक्टेयर की खदान भूमि में कृषि वानिकी के ज़रिए पुनर्निर्माण किया गया।
- उड़ीसा: झारसुगुड़ा स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क में 30 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं, वहीं लांजीगढ़ का एवियन एरिना पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास मुहैया कराता है।
- आंध्र प्रदेश: रावा में कैयर्न ऑयल एंड गैस द्वारा विकसित मानव निर्मित मैन्ग्रोव्स में 150 से अधिक पक्षी प्रजातियां, स्मूद कोटेड ऊदबिलाव और फिशिंग कैट को आश्रय मिला है।
जलवायु और पारिस्थितिकी संरक्षण में अग्रसर
वित्तीय वर्ष 2023-24 में वेदांता ने 20 लाख से अधिक पौधारोपण किए और वर्ष 2030 तक 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। कंपनी ने अपनी 52 परिचालन साइट्स की 100% जैवविविधता स्क्रीनिंग पूरी कर बेसलाइन डेटा तैयार किया है, ताकि जैवविविधता क्षरण को रोका जा सके।
प्रिया अग्रवाल हेब्बर, नॉन-एग्जिक्युटिव डायरेक्टर, वेदांता लिमिटेड ने कहा,
“जैवविविधता न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि मानव समाज के संतुलन के लिए भी ज़रूरी है। हमारी संरक्षण पहलों के माध्यम से हम एक ऐसा भविष्य चाहते हैं, जहां प्रकृति और समुदाय एक साथ विकसित हों।”


