भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ 12 नवंबर 2025 को कालभैरव अष्टमी है, इन दिन बाबा महाकाल के नगर कोतवाल की पूजा का बड़ा ही महत्व है। रात के समय भैरव मंदिरों पर काल भैरव की पूजा अर्चना की जाएगी। धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के कालभैरव स्वरुप की उत्पत्ति मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। काल भैरव अष्टमी तंत्र साधना के लिए उत्तम मानी जाती है, और ऐसी मान्यता है इस दिन काल भैरव की पूजा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। इस दिन कीजिये काल भैरव के प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन…
काल भैरव मंदिर, काशी
वैसे तो भारत में बाबा कालभैरव के कई मंदिर है, जिसमें से काशी के काल भैरव मंदिर की विशेष मान्यता है। यह काशी के विश्वनाथ मंदिर से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद जो भक्त इनके दर्शन नहीं करता है उसकी पूजा सफल नहीं मानी जाती है, इसीलिये भक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद बाबा कालभैरव के दर्शन अवश्य करते हैं।

कालभैरव मंदिर, उज्जैन
काशी के बाद भारत में दूसरा प्रसिद्ध कालभैरव का मंदिर उज्जैन नगर के क्षिप्रा नदी के तट पर है। यहां परंपरा के अनुसार भगवान काल भैरव को प्रसाद को रुप में केवल शराब ही चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि वह महाकाल की नगरी को कोतवाल हैं, जोकि भैरव अष्टमी के अगले दिन भक्तों को दर्शन देने के लिए निकलते हैं, साथ ही पास में स्थित जेल में भी कैदियों को जाकर दर्शन देते हैं।

बटुक भैरव मंदिर,नई दिल्ली
बटुक भैरव मंदिर दिल्ली के विनय मार्ग पर स्थित है। बाबा बटुक भैरव की मूर्ति यहां पर विशेष प्रकार से एक कुएं के ऊपर विराजमान है। यह प्रतिमा पांडव भीमसेन काशी से लाए थे। यहां की मान्यता है कि जिसके दर्शन करने से सारी व्याधियों का नाश होता है।

बटुक भैरव मंदिर पांडव किला
दिल्ली में बाबा भैरव बटुक का मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना पांडव भीमसेन के द्वारा की गई थी। कहा जाता है कि पांडव भीमसेन द्वारा लाए गए भैरव दिल्ली से बाहर ही विराज गए थे तो पांडव बड़े चिंतित हुए। उनकी चिंता देखकर बटुक भैरव ने उन्हें अपनी दो जटाएं दे दीं और उसे नीचे रख कर दूसरी भैरव मूर्ति उस पर स्थापित करने का निर्देश दिया गया।

घोड़ाखाड़ बटुक भैरव मंदिर, नैनीताल
नैनीताल के समीप घोड़ाखाल का बटुकभैरव मंदिर भी अत्यंत प्रसिद्ध है। यहां इन्हें गोलू देवता कहा जाता है। मंदिर में विराजित इस सफेद गोल प्रतिमा की पूजा के लिए रोजाना भक्तों का तांता लगता है।



