Country Without Internet: दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, लेकिन आज भी एक ऐसा देश है, जहां इंटरनेट पूरी तरह से मौजूद नहीं है. यह बात सुनने में हैरान करने वाली लग सकती है, क्योंकि आज के समय में इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस देश ने खुद को आधुनिक तकनीक से काफी हद तक अलग रखा है और अपनी पारंपरिक व्यवस्था के साथ ही आगे बढ़ रहा है.
कहां आज भी नहीं है इंटरनेट
इस देश का नाम है उत्तर कोरिया. यहां की सरकार इंटरनेट के उपयोग पर कड़ा नियंत्रण रखती है. आम लोगों को वर्ल्डवाइड इंटरनेट तक पहुंच नहीं दी जाती. इसके बजाय उन्हें एक सीमित नेटवर्क का उपयोग करने की अनुमति होती है, जिसे सरकार की ओर से नियंत्रित किया जाता है. इस नेटवर्क को इंट्रानेट कहा जाता है, जिसमें केवल चुनिंदा वेबसाइट्स और जानकारी ही उपलब्ध होती है. इसका मकसद देश के नागरिकों तक वही जानकारी पहुंचाना है, जो सरकार चाहती है.
यहां के लोग सीमित एक्सेस करते हैं यूज
उत्तर कोरिया में लोग सोशल मीडिया, गूगल, यूट्यूब या व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकते. यहां तक कि बाहरी दुनिया की खबरों तक भी उनकी सीधी पहुंच नहीं होती. इसके बावजूद वहां की जिंदगी पूरी तरह से रुकी हुई नहीं है. लोग अपने काम करते हैं, पढ़ाई करते हैं और सामान्य जीवन जीते हैं. वहां की शिक्षा और सरकारी व्यवस्था इस तरह बनाई गई है कि लोगों को इंटरनेट की जरूरत कम महसूस हो. यहां के दफ्तरों और संस्थानों में कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है, लेकिन वे भी बाहरी नेटवर्क से जुड़े नहीं होते. सरकारी कामकाज और सूचनाओं का आदान-प्रदान उसी सीमित नेटवर्क के जरिए किया जाता है. वहीं, मनोरंजन के लिए लोग टीवी और रेडियो का सहारा लेते हैं, जिनमें भी सरकार द्वारा स्वीकृत सामग्री ही दिखाई जाती है.
उत्तर कोरिया में मोबाइल फोन मौजूद हैं, लेकिन उनका उपयोग भी सीमित है. लोग कॉल और मैसेज कर सकते हैं, लेकिन इंटरनेट एक्सेस आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है. कुछ खास अधिकारी और विदेशी मेहमानों को ही सीमित रूप में इंटरनेट की सुविधा दी जाती है. इस तरह सरकार पूरी तरह से यह तय करती है कि देश में किस तरह की जानकारी पहुंचेगी और कौन क्या देख या पढ़ सकता है. भले ही दुनिया के बाकी हिस्सों में इंटरनेट के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल हो, लेकिन उत्तर कोरिया में यह एक सामान्य बात है. वहां के लोग अपनी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल चुके हैं. यह देश एक अलग ही उदाहरण पेश करता है, जहां तकनीक की मौजूदगी के बावजूद उसे पूरी तरह अपनाया नहीं गया है.
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