भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण तकनीकी पहलें शुरू की हैं। इनका उद्देश्य मृत मतदाताओं के नाम हटाना, पहचान को स्पष्ट करना और मतदाता सूची को अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाना है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) राजीव कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें निर्वाचन आयुक्त डॉ. सैयद मुहम्मद हुसैन और श्री विवेक जोशी भी उपस्थित रहे।
तीन नई पहलें इस प्रकार हैं:
1. मृत्यु पंजीकरण का डेटा डिजिटली एकीकृत होगा: अब भारत के महापंजीयक से मृत्यु प्रमाण पत्र का डेटा सीधे इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त होगा। इससे संबंधित मतदाता के नाम को मतदाता सूची से हटाने में पारदर्शिता और गति आएगी। यह प्रक्रिया भारत के जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के अनुसार पूरी होगी।
2. मतदाता सूची का बेहतर डिजाइन: अब मतदाता सूची को अधिक स्पष्ट, बड़े फॉन्ट और ज्यादा स्थान के साथ प्रकाशित किया जाएगा। इससे मतदाताओं को अपनी प्रविष्टि पहचानने में आसानी होगी और मतदान अधिकारी भी उन्हें आसानी से खोज सकेंगे।
3. फोटो पहचान पत्र का एकीकरण: बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) अब मतदाता सूची में दर्ज नाम को मतदाता द्वारा प्रस्तुत पहचान पत्र जैसे आधार, पैन या अन्य फोटो आईडी से मिलान करके सत्यापित कर सकेंगे। यह जानकारी इंटरफेस के जरिए साझा की जाएगी।
यह कदम विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी झुग्गी बस्तियों में मतदाता पहचान की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। साथ ही चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता और विश्वसनीयता को बढ़ाएगा।
भारत निर्वाचन आयोग की यह तीन पहलें डिजिटल चुनाव सुधार की दिशा में एक ठोस कदम हैं। इनसे न सिर्फ मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकेंगे बल्कि हर नागरिक की पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।


