जब भी दिल की बीमारी या हार्ट अटैक की बात आती है, तो अमूमन लोग सीने के भयानक दर्द, सांस रुकने या बेहोश होकर गिरने जैसे लक्षणों के बारे में सोचते हैं. हालांकि, हृदय विशेषज्ञों का कहना है कि दिल से जुड़े हर खतरे के लक्षण इतने साफ नहीं होते. कई बार शुरुआती इशारे इतने मामूली होते हैं कि हम उन्हें मामूली थकान, तनाव या पेट की गैस मानकर टाल देते हैं. डॉक्टर यही सलाह दे रहे हैं कि किसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी का इंतजार करने के बजाय समय रहते दिल की सेहत का ध्यान रखें.
सामान्य लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अक्सर थकान, हल्की सांस फूलना या सीने में अजीब सी बेचैनी होना हमेशा दिल का रोग नहीं होता. फिर भी, अगर ये दिक्कतें बिना किसी वजह के बार-बार हों या थोड़ा सा काम करते ही महसूस होने लगें, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है. लक्षणों को देखकर खुद ही कोई नतीजा निकालने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है, ताकि बाकी मेडिकल जोखिमों का भी सही समय पर पता चल सके.
‘साइलेंट रिस्क’ का बढ़ता खतरा और युवाओं में बदलती तस्वीर
कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बिना कोई लक्षण दिखाए दिल को चुपचाप नुकसान पहुंचाती हैं. हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज ऐसी ही स्थितियां हैं जो बिना किसी बड़े इशारे के दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देती हैं. इसके अलावा, परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास, धूम्रपान, मोटापा, सुस्त जीवनशैली और तनाव भी जोखिम बढ़ाते हैं. पहले जहां इसे सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, वहीं आज खराब जीवनशैली, नींद की कमी, जंक फूड और अत्यधिक तनाव की वजह से युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं.
महिलाओं में अलग लक्षण और बचाव के आसान रास्ते
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हार्ट अटैक के संकेत काफी अलग हो सकते हैं. महिलाओं में सीने के तेज दर्द की जगह बिना वजह अत्यधिक थकान, जी मिचलाना, चक्कर आना या पीठ, गर्दन, जबड़े और पेट के ऊपरी हिस्से में खिंचाव या बेचैनी जैसे लक्षण ज्यादा देखे जाते हैं. डॉक्टरों का मकसद डराना नहीं, बल्कि सचेत करना है. नियमित हेल्थ चेकअप, सही खान-पान, रोजमर्रा में व्यायाम और बीपी-शुगर को नियंत्रित रखकर दिल को लंबे समय तक सेहतमंद रखा जा सकता है.
