ट्रेन की भारी देरी की वजह से मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलने वाले एक रेल यात्री के हक में झारखंड के उपभोक्ता आयोग ने राहत भरा फैसला सुनाया है. मामला सितंबर 2024 का है, जब एक यात्री ने टाटानगर से संबलपुर के लिए इस्पात एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास की दो टिकटें बुक की थीं. हालांकि, यह ट्रेन अपने निर्धारित समय के बजाय पूरे 8 घंटे 48 मिनट की देरी से संबलपुर पहुंची. इस लापरवाही से हुए नुकसान के बाद यात्री ने पहले रेलवे को कानूनी नोटिस भेजा और फिर उपभोक्ता फोरम का रुख किया.
‘सेवा में कमी’ मानते हुए रेलवे का दावा खारिज
मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे ने यह दलील देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि यह प्रकरण केवल रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT) के तहत आता है. लेकिन उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और सदस्यों ने रेलवे की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया. आयोग ने इसे साफ तौर पर रेलवे की ‘सेवा में कमी’ का मामला माना और रेलवे को 45 दिनों के भीतर 30,000 रुपये मुआवजा तथा 5,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में कुल 35,000 रुपये जमा कराने का सख्त निर्देश दिया.
ट्रेन लेट होने पर रेल यात्रियों को मिलते हैं ये अधिकार
रेलवे रिफंड नियम 2015 के तहत यदि ट्रेन अपने प्रस्थान स्टेशन से 3 घंटे या उससे अधिक देरी से चलती है, तो यात्रियों को कई प्रमुख अधिकार दिए गए हैं:
- 100% रिफंड: यदि ट्रेन 3 घंटे या उससे ज्यादा लेट है और आप सफर नहीं करना चाहते, तो बिना किसी कैंसिलेशन फीस के पूरा किराया वापस मिलेगा.
- कनेक्टिंग ट्रेन छूटने पर पूरा पैसा: अगर पहली ट्रेन की देरी से आगे की कनेक्टिंग ट्रेन छूट जाती है, तो अगली यात्रा का पूरा रिफंड मिलेगा. इसके लिए बुकिंग के समय IRCTC पर ‘कनेक्टिंग जर्नी’ का विकल्प चुनना जरूरी है.
- मुफ्त खानपान: शताब्दी, राजधानी और दुरंतो जैसी प्रीमियम गाड़ियों के 2 घंटे से अधिक लेट होने पर रेलवे की तरफ से यात्रियों को नि:शुल्क चाय, नाश्ता, भोजन और पानी दिया जाता है.
- तेजस में इंश्योरेंस क्लेम: तेजस एक्सप्रेस में 1 घंटे की देरी होने पर 100 रुपये और 2 घंटे से ज्यादा देर होने पर 250 रुपये का मुआवजा क्लेम के जरिए मिलता है.
रिफंड पाने के लिए TDR दाखिल करना न भूलें
यात्रियों को ध्यान रखना चाहिए कि ट्रेन लेट होने की स्थिति में रिफंड का पैसा खुद-ब-खुद खाते में ट्रांसफर नहीं होता. इसके लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर टीडीआर (Ticket Deposit Receipt) दाखिल करना अनिवार्य होता है, तभी रिफंड की प्रक्रिया पूरी हो पाती है.
