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Friday, April 17, 2026
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NSUI के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की पूरी कहानी…. फर्श से अर्श तक का तय किया सफर !

वेटर की नौकरी और 2 बार रिजेक्शन, फिर मिली सबसे बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ संघर्ष का नतीजा सफलता का सबसे बड़ा रास्ता है, ये किस तरह तय किया जा सकता है, किस तरह से सियासत में अलग मुकाम हासिल किया जा सकता है, कैसे अपने आपको साबित किया जा सकता है, ये साबित करने का काम किया है, NSUI के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने। जिन्होंने जातिवादी समाज में जन्म लेकर अपनी काबिलियत के दम पर साबित कर दिखाया कि अगर राह तय कर ली जाए, तो एक दिन मंजिल जरुर मिलती है, चाहे डगर कितनी भी कठिन क्यों ना हो। राजस्थान के एक छोटे से समाज में जन्म लेने वाले विनोद जाखड़ ने नए प्रतिमान स्थापित कर दिए हैं।

राजस्थान का लाल विनोद जाखड़
विनोद जाखड़ का जन्म 7 सितंबर 1994 को एक दलित परिवार राजस्थान के जयपुर जिले की विराटनगर तहसील के मेड़ जोधुला गांव में हुआ था। उनके पिता पूर्ण मल जाखड़ पेशे से एक कारीगर थे और माता का नाम श्रीमती छोटा देवी है। सामान्यतः ‘जाखड़’ उपनाम से उनके जाट समुदाय से होने का भ्रम होता है, किंतु विनोद जाखड़ मेघवाल समाज (SC दलित समुदाय) से आते हैं। राजस्थान के एक साधारण दलित परिवार से आने वाले एक संघर्षरत युवा नेता एक छोटे से गांव से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले संघर्षशील छात्र नेता विनोद जाखड़ को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। शीर्ष नेतृत्व, जिन्होंने एक जमीनी और संघर्षशील कार्यकर्ता को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।

जाखड़ को नहीं मिला था टिकट
वर्ष 2014 में विनोद जाखड़ ने राजस्थान कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए NSUI से टिकट मांगा, परंतु संगठन ने उन पर विश्वास नहीं जताया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और विजय प्राप्त की। यह पहली बार था जब एक दलित परिवार का युवक राजस्थान कॉलेज का अध्यक्ष चुना गया, बाद में वे पुनः NSUI से जुड़कर संगठन में सक्रिय रूप से कार्य करने लगे। वर्ष 2016 में उन्होंने फिर से NSUI से यूनिवर्सिटी से अध्यक्ष पद के लिए टिकट की मांग की, लेकिन पार्टी ने उन्हें और मेहनत करने की सलाह दी।इसके बावजूद उन्होंने संगठन में अपना कार्य जारी रखा। इस दौरान विनोद जाखड ने वेटर बनकर भी अपनी आजीविका चलाई थी।

एक बार फिर नहीं दिया टिकट
साल 2018 में लगातार चार वर्षों तक NSUI में सक्रिय रहने के बाद भी उन्हें अध्यक्ष पद का टिकट नहीं दिया गया। पार्टी ने उन्हें महासचिव पद का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। इस चुनाव में उन्हें इतने मत प्राप्त हुए, जो ABVP और NSUI दोनों को मिले मतों के कुल योग से अधिक थे। इस प्रकार वे विश्वविद्यालय के पहले दलित छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए, हालांकि उन्हें अपने हर वर्ग के साथियों का पूरा समर्थन मिला, जोकि कांग्रेस की विचारधारा पर विश्वास रखते हैं।

पूर्व सीएम अशोक गेहलोत ने थी बधाई
चुनाव जीतने के बाद विनोद जाखड़ को राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फोन पर बधाई दी और लंच पर बुलाया। सचिन पायलट ने भी उनसे मुलाकात की। बाद में राहुल गांधी की मौजूदगी में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की और पुनः NSUI का दामन थाम लिया। अब साल 2026 में विनोद जाखड को NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह बताता है कि संघर्ष और धरातल पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को संगठन अवश्य ही एहमियत प्रदान करता है।

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