Tuesday, November 3, 2026
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सावन में नागपंचमी का पर्व क्यों आता है, जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और प्राकृतिक कारण और नागो को देवता के रूप मे क्यों पूजा जाता है जानिये इसका रहस्य

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सावन का महीना आते ही भगवान शिव की भक्ति के साथ नाग देवता की पूजा की परंपरा भी दिखाई देने लगती है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला नागपंचमी पर्व सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है।

इस दिन नाग देवता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की जाती है।पौराणिक मान्यता के अनुसार नाग भगवान शिव के अत्यंत प्रिय हैं। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग उनकी शक्ति और निर्भयता के प्रतीक माने जाते हैं। यही कारण है कि सावन में शिव आराधना के साथ नाग पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है।

धार्मिक कथाओं में शेषनाग, वासुकी और तक्षक सहित अनेक नागों का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि नाग देवताओं की पूजा करने से सर्प भय से रक्षा होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।लेकिन नागपंचमी के पीछे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू भी माना जाता है। सावन के दौरान बारिश के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकलते हैं।

खेतों और ग्रामीण इलाकों में इनकी मौजूदगी बढ़ जाती है।

ऐसे समय में नागों के प्रति सम्मान और उनके संरक्षण का संदेश भी इस पर्व से जुड़ा माना जाता है।यानी नागपंचमी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन तथा जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भारतीय परंपरा का प्रतीक भी है।

सावन में ही क्यों पड़ती है नागपंचमी? इसके पीछे धर्म के साथ प्रकृति का भी गहरा संबंधबारिश शुरू होते ही बिलों से बाहर आते हैं सर्प, नागपंचमी ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेशसावन यानी बारिश, हरियाली और भगवान शिव की आराधना का महीना। इसी महीने में नागपंचमी का पर्व भी आता है। सवाल यह है कि आखिर नागपंचमी सावन में ही क्यों मनाई जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन भगवान शिव को समर्पित महीना है और नाग भगवान शिव के गले का आभूषण माने जाते हैं।

इसलिए सावन की पंचमी को नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।वहीं प्रकृति के नजरिए से देखें तो बारिश के मौसम में जमीन के भीतर पानी पहुंचने और बिलों में नमी बढ़ने के कारण सांप अक्सर सुरक्षित स्थानों की तलाश में बाहर निकलते हैं।

खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में इस दौरान सर्प दिखाई देने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं।

ऐसे समय में नागपंचमी की परंपरा लोगों को नागों के प्रति श्रद्धा और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। भारतीय संस्कृति में नाग को केवल एक जीव नहीं, बल्कि प्रकृति और धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीक के रूप में देखा गया है।

यही वजह है कि नागपंचमी को केवल एक धार्मिक त्योहार के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति भारतीय समाज की संवेदनशीलता से जुड़ी परंपरा के रूप में भी देखा जा सकता है।हालांकि आज के दौर में नाग पूजा के नाम पर जीवित सांपों को पकड़ना, उन्हें परेशान करना या दूध पिलाना उचित नहीं माना जाता।

वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास का सम्मान करना ही इस परंपरा की भावना के अधिक अनुरूप है।

सावन की पंचमी पर क्यों होती है नाग देवता की पूजा, क्या है भगवान शिव और नागों का संबंध?

एक तरफ सावन में हर ओर भगवान शिव के जयकारे गूंजते हैं और दूसरी तरफ इसी महीने की पंचमी को नाग देवता की पूजा की जाती है।

आखिर नागों को देवता का दर्जा क्यों दिया गया?

और क्या नागपंचमी के पीछे केवल धार्मिक कथा है या इसके पीछे प्रकृति का भी कोई संदेश छिपा है?

सनातन परंपरा में नागों का संबंध भगवान शिव, भगवान विष्णु और पाताल लोक की अवधारणा से जोड़ा गया है।

भगवान शिव के गले में नाग और भगवान विष्णु की शैय्या के रूप में शेषनाग का वर्णन मिलता है।

यही वजह है कि नागों को भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है।

नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा कर लोग सर्पदंश से सुरक्षा, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं सावन में बारिश के कारण सांपों के बिलों में पानी भरने से उनका बाहर निकलना भी आम बात है।

इस तरह देखा जाए तो नागपंचमी की परंपरा में आस्था और प्रकृति—दोनों का अद्भुत मेल दिखाई देता है।

शायद यही इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश है—प्रकृति में मौजूद हर जीव का अपना महत्व है और मनुष्य का अस्तित्व भी उसी प्राकृतिक संतुलन से जुड़ा हुआ है।

सौरभ श्रीवास्तव कटनी ✍️

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