भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ ट्रेनों के एसी कोच में यात्रियों के सामान की चोरी की घटनाओं को लेकर रेलवे ने अब सख्त रुख अपनाया है। रेल पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार, एसी कोच में चोरी की घटना होने पर संबंधित कोच अटेंडर की भूमिका की भी अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी और परिस्थितियों के आधार पर उसे आरोपी बनाया जा सकेगा। रेलवे पुलिस का तर्क है कि एसी कोच में तैनात अटेंडर की जिम्मेदारी केवल यात्रियों की सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे कोच की निगरानी और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े दायित्व भी निभाने होते हैं। ऐसे में ड्यूटी के दौरान चोरी की घटना सामने आने पर अटेंडर की भूमिका जांच के दायरे में आना स्वाभाविक है।
लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाएं
एसी कोच में पिछले कुछ समय से लगातार चोरी के मामले सामने आने के बाद रेलवे पुलिस मुख्यालय ने यह कदम उठाया है। जांच के दौरान कुछ मामलों में कोच अटेंडरों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इसी के चलते अब चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अटेंडरों की जवाबदेही तय करने की तैयारी की गई है।
विदिशा में तीन साल में 116 मामले
विदिशा जीआरपी थाने के आंकड़े रेलवे में बढ़ती चोरी की घटनाओं की तस्वीर सामने रखते हैं। यहां पिछले तीन वर्षों में 116 चोरी के मामले दर्ज किए गए। इनमें बड़ी संख्या एसी कोच से जुड़ी घटनाओं की बताई जा रही है। इसके मुकाबले स्लीपर और जनरल कोच में चोरी के मामले अपेक्षाकृत कम रहे।
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ग्वालियर में दो साल में तीन गुना बढ़े केस
ग्वालियर जीआरपी क्षेत्र में भी एसी कोच में चोरी के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में 109, वर्ष 2023 में 129 और वर्ष 2024 में 334 चोरी के मामले सामने आए। इस तरह दो वर्षों के दौरान मामलों की संख्या में करीब तीन गुना तक बढ़ोतरी हुई।
वन्यजीव तस्करी में भी सामने आई थी अटेंडर की भूमिका
रेलवे में अटेंडरों की भूमिका को लेकर सवाल पहले भी उठ चुके हैं। इसी साल फरवरी में रेल नेटवर्क के जरिए वन्यजीव तस्करी के एक मामले का खुलासा हुआ था। इस प्रकरण में एक ट्रेन कोच अटेंडर को मुख्य आरोपी बनाया गया था। उसके पास से दो बैगों में छिपाकर रखे गए 311 जीवित दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए बरामद किए गए थे। इसके अलावा यात्रियों के सामान की चोरी से जुड़े कुछ मामलों की जांच में भी अटेंडरों की भूमिका संदिग्ध सामने आने का दावा किया गया है।
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यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
डीजी रेल राजाबाबू सिंह ने कहा कि ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा जीआरपी की प्राथमिकता है। एसी कोच में चोरी होने की स्थिति में अब अटेंडर की भूमिका की जांच जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। रेलवे पुलिस के इस कदम से अब एसी कोच में तैनात अटेंडरों की जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों बढ़ने की संभावना है।
