Ajab Gajab MP: चंदेरी/ निर्मल विश्वकर्मा/ खबर डिजिटल/ चंदेरी तहसील कार्यालय जो लगातार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भ्रष्टाचार युक्त कार्य प्रणाली के चलते शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में चर्चा का विषय बना रहता है जहां पैसों के बल पर नियम कानून की अनदेखी कर कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर ऐसा कोई कार्य नहीं जो संपन्न नहीं कराया जा सकता तहसील प्रशासन में पदस्थ जिम्मेदारों की कारगुजारी का खामियांजा उन नागरिकों को तो भोगना ही पड़ता है साथ ही विवाद की स्थिति में सक्षम न्यायालयों को भी तहसील कार्यालय द्वारा कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर गैर कानूनी तरीके से दिए गए निर्णयों /जारी किए गए वर्षों पुराने विवाद ग्रस्त जन्म एवं मृत्य प्रमाण के द्वारा तैयार किए गए प्रकरणों का अनावश्यक बोझ झेलना पड़ता है।
यही कारण है कि सक्षम न्यायालय में तहसील कार्यालय द्वारा जारी निर्णय के विरुद्ध आवेदक को अपना पक्ष रखना पड़ता है ताकि उसे न्याय मिल सके यदि समय रहते तहसील कार्यालय में ही विधि संगत न्याय पूर्ण कार्यवाही संपन्न हो तो अनावश्यक विवाद की स्थिति में न्यायालय में इन प्रकरणों को रखने की आवश्यकता ही नहीं पड़े किंतु भ्रष्टाचार युक्त कार्य प्रणाली के चलते जानबूझकर तहसील कार्यालय में नियमों को अनदेखी कर विवाद ग्रस्त स्थिति निर्मित की जाती है ताकि आम नागरिकों को आर्थिक एवं पारिवारिक संकट का सामना करना पड़े।
यह है पूरा मामला
मामला ग्राम पंचायत मोहनपुर तहसील चंदेरी का है जहां कमल सिंह लोधी ने फर्जी मार्कशीट एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0376/ड- 154(1)/2024- 25 तथा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0067/ड – 154/2024- 25 और भैया लाल लोधी ने फर्जी वसीयत नामा तैयार करने के लिए कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र प्रकरण क्रमांक 0077/ड – 154/2024- 25 के माध्यम से तैयार करवाया ताकि पूर्व में सम्पन्न कराए गए।
विक्रय पत्र शून्य किए जा कर फर्जी फौती नामांतरण किया जा सके जिसमें तहसील प्रशासन में पदस्थ जिम्मेदारों के सहयोग से कूट रचित दस्तावेज तैयार कर वर्षों पुराने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवाए और वे जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र ही सक्षम न्यायालयीन प्रक्रिया में वाद का कारण बन रहे हैं ऐसा नहीं की पीड़ित पक्षकार रविकांत शेषा ने इन तैयार किए गए कूट रचित दस्तावेजों की शिकायत तहसील प्रशासन, एसडीएम प्रशासन तथा कलेक्टर जिला अशोकनगर से नहीं की।
किंतु दो माह से अधिक समय व्यतीत हो जाने के पश्चात भी आज तक इन कूट रचित दस्तावेज तैयार करने वालों सहित फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वाले तहसील प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई संपन्न नहीं हो पाई है।।
जांच का विषय वर्षों से तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबुओं की भूमिका संदिग्ध
प्राप्त जानकारी अनुसार चंदेरी तहसील में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में तैयार किए गए जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र,एवं नामांतरण का यह पहला मामला नहीं है ऐसे कई मामले जो तहसील प्रशासन मैं पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी के सहयोग से बनाए जा रहे हैं और उन्हीं के आधार पर विधि विपरीत तरीके से तत्काल नामांतरण प्रकरण संपन्न कराए जा रहे हैं इन समस्त प्रकरणों में तहसील कार्यालय में बरसों से पदस्थ बाबुओं की भूमिका संदिग्ध है
जो अधिकारियों को गुमराह कर ऑर्डर सीट /नोट सीट तैयार कर उनके हस्ताक्षर करवाते हैं।इन समस्त प्रकरणों की जांच की जाना नितांत आवश्यक हो गया है क्योंकि फर्जी दस्तावेजों और प्रशासनिक जिम्मेदारों की मिली भगत के चलते ऐसे निराकरण/ नामांतरण न्यायालयीन प्रक्रिया में विवाद का कारण बन रहे हैं और सक्षम न्यायालयो पर अनावश्यक प्रकरणों का बोझ पड़ रहा है जिससे अन्य न्यायालयीन प्रकरण बाधित हो रहे हैं।
जिसका खामियाजा पीड़ित पक्षकार को तो भोगना ही पड़ रहा है प्रशासन को भी गंभीर आर्थिक क्षति हो रही है यदि समय रहते तहसील कार्यालय चंदेरी में सम्पन्न कराए गए पिछले दो वर्षों के नामांतरण प्रकरणों की जांच सम्पन्न नहीं कराई गई तो ऐसे कई प्रकरण सामने आएंगे जो आगामी भविष्य में न्यायालय में अनावश्यक प्रकरणों के चलते बोझ का कारण बनेंगे।


