भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ राजधानी भोपाल में अब 883 स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है, उन पर मनमानी फीस वसूलने का आरोप लगा है। कई बार बच्चों के पैरेंट्स शिक्षा विभाग को शिकायत कर चुके हैं, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों से फीस के बारे में जानकारी मांगी थी, लेकिन निजी स्कूलों ने फीस के बारे में जानकारी देना ठीक नहीं समझा, जिसके बाद अब उन्हें नोटिस का जवाब नहीं देने पर मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी गई है।
मनमानी फीस वसूली पर बना कानून
एमपी में निजी स्कूलों में मनमानी फीस वसूली को लेकर साल 2018 में कानून बनाया गया था, लेकिन अब तक यह कितना अमल में आया है, ये स्कूलों को दिए नोटिस से साबित हो गया। इस कानून के तहत निजी स्कूल कापी-किताब, यूनिफार्म, कंप्यूटर लैब, एनुअल फंक्शन और ट्रांसपोर्टेशन चार्ज के नाम पर अवैध वसूली नहीं कर सकते हैं। अभिभावकों को प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमर्जी से राहत दिलाने के नाम पर लाया गया नया कानून 25 जनवरी 2018 को लागू हुआ था। वहीं अब तक कई शैक्षणिक सत्र खत्म होने के बाद भी कितना इस पर अमल किया गया। खबर बता रही है।
अभिभावकों ने की कई बार शिकायत
निजी स्कूलों की लगातार बढ़ती फीस को लेकर अभिभावकों ने कई बार शिक्षा विभाग को शिकायत की, जबकि अब तक ये स्कूल कितना रुपया पैरेंट्स से वसूल चुके हैं। यहां तक कि निजी स्कूल संचालक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को कोरोना के दौरान लॉकडाउन पीरियड की पूरी फीस का भुगतान करने के लिए मजबूर किया। जबकि नए कानून में था कि ऑनलाइन क्लास की फीस नहीं वसूली जाएगी। लेकिन अधिकांश स्कूल संचालक फीस में कोई राहत देने को तैयार नहीं हुए।
कमेटियां ने किया कितना काम
निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कानून में साफ था कि शिकायतों की सुनवाई और जांच के लिए हर जिले में जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय कमेटी शिक्षण संचालनालय बनाएगा। जिला कमेटी में सदस्य के रूप में चार और राज्य कमेटी में पांच सरकारी अधिकारी शामिल करने का प्रावधान था, लेकिन अब तक इन कमेटियों का कितना प्रभाव दिखाई दे रहा है, जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश बता रहा है।


