Khabar Digital: पद की लालसा और नेतागिरी में करियर और नेताओ की आंख का तारा बनने की लालसा, युवा कार्यकर्ताओं को न तो परिवार की चिंता हो रही है, और न ही व्यवसाय की फिक्र। पार्टी की कार्यकारणी में स्थान पाने की होड़ में लगे इन नेताओं की हालत किस कदर बिगड़ती जा रही है, इसका मुजाहिरा आज हम आपको कराएंगे, कि कैसे अपने नेताओं के आश्वाशन पर युवा कार्यकर्ता कुछ भी करने को आतुर रहते है, और जब पद नही मिलता तो हंसी का यात्र बनते है, और फिर शुरू होता है मानसिक कष्ट, जो बाद में डिप्रेशन में तब्दील हो जाता है, ऐसे में सिर्फ परिजन ही काम आते है। जीहां दरअसल ये कहानी है सीहोर के बीजेपी नेता मनोज शर्मा की।
वार्ड नंबर 6 में रहते हैं मनोज शर्मा
मध्यप्रदेश के सीहोर के वार्ड नंबर 6 में रहने वाले भाजपा कार्यकर्ता मनोज शर्मा जी-जान से रात दिन अपनी प्यारी पार्टी बीजेपी के लिए कार्य करते रहे, नेताओ ने भी मनोज शर्मा को जिला कार्यकारणी में उचित पद का भरोसा दिलाया, युवा नेता मनोज शर्मा नेताओ से आश्वाशन के बाद पूरे दमखम ओर उत्साह से पार्टी का काम करने लगे, मौका हो किसी भी वरिष्ठ नेता के जन्मदिन का, या फिर कोई भी सामाजिक कार्य हो, पोस्टर बैनर से लेकर कार्यक्रम तक की व्यवस्था तक का जिम्मा संभाला, मगर अबकी बार जब उसे जिला कार्यकारिणी में जगह नहीं दी गई तो वो डिप्रेशन में चला गया और अब अस्पताल के बिस्तर पर अपना इलाज करा रहा है।
मनोज शर्मा की तारीफ करते हैं वरिष्ठ नेता
राजनीति के पड़ाव पर आगे बढ़ने की लालसा पाले मनोज शर्मा आगे बढ़ते रहे, मन लगाकर पार्टी के हर काम को पूरी शिद्दत के साथ करते रहे, ऐसे में समय गुजरता गया, पहले जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा हुई, फिर कुछ महीनों बाद जिला कार्यकारिणी की घोषणा हो गई। अपना नाम न पाककर मनोज शर्मा के पैरों तले जमीन खिसक गई, तत्काल आश्वाशन देने वाले वरिष्ठ नेताओं को फोन लगाना शुरू किया, किसी ने भी फोन रिसीव नही किया, तो किसी ने फोन उठाना तक ठीक नहीं समझा। नेताओ की बेरुखी ओर वादाखिलाफी के बाद मनोज शर्मा निराशा के अन्धकार में डूबने लगे, और डिप्रेशन में चले गए, जिसके बाद परिजनों को मनोज की हालत देखी नही गई, तो हॉस्पिटल में भर्ती कर इलाज करवा रहे हैं, ये सब बताने का उद्देश्य आपको ये है कि सियासत में करियर बनाने के तो सोचे पर मनोज शर्मा की हालत से भी कुछ सीखें।
सीहोर से खबर डिजिटल के लिए संजय त्यागी की रिपोर्ट


