मुरैना/ शुभम कुलश्रेष्ठ/ खबर डिजिटल/ जिले की अटूट आस्था के केंद्र करहधाम में 68वें ‘सिय-पिय मिलन समारोह’ का आयोजन 2 फरवरी से 9 फरवरी तक किया गया। संत रतनदास महाराज (पटिया वाले बाबा) की पावन स्मृति में आयोजित इस वार्षिक उत्सव की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। इस धार्मिक महाकुंभ में मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से भी लाखों श्रद्धालु आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं।
सेवा का अनूठा संगम: 50 गांवों का संयुक्त प्रयास
इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यहां की व्यवस्था और जन-भागीदारी है। 9 फरवरी को आयोजित होने वाले मुख्य भंडारे में लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। यहां परोसने की जिम्मेदारी आसपास के 50 गांवों के ग्रामीणों ने संभाल रखी है। 4-5 गांवों की टोलियां बनाकर लोग खीर, मालपुआ, सब्जी और बूंदी परोसते हैं। ट्रॉलियों में भरकर पकवान रखे जाते हैं, ताकि सेवा निरंतर चलती रहे।
अखंड रामधुन और समाधि स्थल का प्रताप
करह आश्रम में लंबे समय से चल रही अखंड रामधुन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। यह रामधुन ठीक उसी स्थान पर हो रही है जहां संत रामरतन दास महाराज ने समाधि ली थी। मंदिर आने वाले हजारों भक्त इस अखंड संकीर्तन में शामिल होकर आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं।
जब सरयू के जल में सिके थे मालपुआ
आश्रम से जुड़ी एक लोककथा आज भी चर्चा में रहती है। कहा जाता है कि एक बार भंडारे में घी कम पड़ने पर पटिया वाले बाबा ने परिसर के प्राचीन कुएं (जिसे सरयू कहा जाता है) के जल को कढ़ाई में डलवा दिया था, जिससे मालपुआ सिक कर तैयार हो गए। बाद में उतना ही घी कुएं में वापस अर्पित कर दिया गया। मान्यता है कि इस कुएं के जल में स्नान या आचमन करने से कुत्ता काटने का संक्रमण भी दूर हो जाता है।
