खबर डिजिटल/छिंदवाड़ा। मानवीय सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की एक अद्भुत मिसाल पेश करते हुए पुलिस बल ने सिमरिया के पास हुए भीषण बस हादसे में 40 लोगों को नई जिंदगी दी है। मुख्यमंत्री के 26 मार्च के दौरे से लौट रहे लाभार्थियों की बस पलटने के बाद, वहां से गुजर रहे पुलिस जवानों ने जो तत्परता दिखाई, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
कांच के टुकड़ों पर नंगे पैर दौड़े जवान
हादसे के वक्त पीटीएस रीवा का पुलिस बल मुख्यालय की ओर लौट रहा था। जैसे ही उनकी नजर पलटी हुई बस पर पड़ी, जवानों ने एक पल की भी देरी नहीं की। स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई जवान जूते पहनने तक का समय बर्बाद नहीं करना चाहते थे। वे सड़क पर बिखरे कांच के टुकड़ों की परवाह किए बिना नंगे पैर ही घायलों की मदद के लिए दौड़ पड़े।
अद्भुत सूझबूझ और रेस्क्यू ऑपरेशन
पुलिस ने डायल-112 को तुरंत सूचित किया, लेकिन मदद का इंतजार करने के बजाय खुद ही मोर्चा संभाल लिया। जवानों ने अपनी ताकत और सामूहिकता का परिचय देते हुए पलटी हुई बस को करीब तीन फीट तक ऊपर उठाया, ताकि उसके नीचे दबे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इस त्वरित कार्रवाई और स्थानीय पुलिस के साथ बेहतर समन्वय के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और सभी घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया।
113 पुलिसकर्मी होंगे सम्मानित
जवानों के इस अदम्य साहस को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने रेस्क्यू में शामिल कुल 113 पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करने के आदेश जारी किए हैं। इनमें पीटीएस रीवा के 105 और छिंदवाड़ा जिला पुलिस के 8 जांबाज शामिल हैं। पुलिस की इस तत्परता ने साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि मानवता की रक्षा के लिए भी सदैव तत्पर रहती है।
देखिए लिस्ट…






