Wednesday, November 4, 2026
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बच्चों की फर्राटेदार अंग्रेजी पर कलेक्टर ने बढ़ाया हौसला, अब स्कूल की व्यवस्थाओं की भी हो नियमित समीक्षाअनुष्का और दीपांशु ने अंग्रेजी में दिए जवाब, पहाड़े भी सुनाए; निरीक्षण के दौरान बच्चों की शैक्षणिक तैयारी परखी गई

खबर डिजिटल कटनी, — शासकीय प्राथमिक विद्यालय इंद्रानगर के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर आशीष तिवारी ने बच्चों से संवाद कर उनकी शैक्षणिक तैयारी और आत्मविश्वास को परखा। कक्षा-3 की छात्रा अनुष्का ने कलेक्टर के सवाल का अंग्रेजी में जवाब देते हुए कहा, “माय फेवरेट कलर इज ब्लू…”। उसके आत्मविश्वास से प्रभावित होकर कलेक्टर ने उसे गोद में उठाकर स्नेहपूर्वक उसका हौसला बढ़ाया।इसी दौरान कक्षा-2 के छात्र दीपांशु ने भी अंग्रेजी में अपने पसंदीदा रंग का जवाब दिया। कलेक्टर ने बच्चों से पहाड़े भी सुने। दीपांशु ने 4 का और अनुष्का ने 2 का पहाड़ा सुनाया। बच्चों के जवाब पर अधिकारियों ने उनकी सराहना की और नियमित रूप से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ हरिसिमरनप्रीत कौर और डीएफओ गर्वित गंगवार भी मौजूद रहे।बच्चों के प्रदर्शन के साथ पूरे स्कूल की स्थिति भी महत्वपूर्णबच्चों का आत्मविश्वास और उनकी शैक्षणिक तैयारी निश्चित रूप से सकारात्मक पहलू है। हालांकि, किसी भी शासकीय विद्यालय की स्थिति का आकलन केवल कुछ बच्चों के जवाबों से नहीं किया जा सकता। विद्यालय में सभी बच्चों का सीखने का स्तर, उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यक्रम की प्रगति और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी समीक्षा का हिस्सा होना जरूरी है।यदि विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर कोई शिकायत या कमी सामने आती है, तो उसका उल्लेख संबंधित अभिलेख, निरीक्षण रिपोर्ट या जिम्मेदार अधिकारी के पक्ष के साथ किया जाना अधिक तथ्याधारित होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर किसी विशिष्ट कमी या अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं है।सवाल यह कि हर बच्चे तक पहुंचे गुणवत्तापूर्ण शिक्षाअनुष्का और दीपांशु जैसे बच्चों का आत्मविश्वास निश्चित तौर पर उत्साह बढ़ाने वाला है। अब आवश्यकता इस बात की है कि विद्यालय के प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक प्रगति का नियमित मूल्यांकन हो और जहां भी कमी मिले, उसे दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इससे निरीक्षण का उद्देश्य केवल बच्चों की प्रतिभा की सराहना तक सीमित न रहकर शिक्षा की समग्र गुणवत्ता सुधारने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेगा।

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