MLA Ajay Singh: मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में बिना मुकाबला किए ही घुटने टेकने वाली मध्य प्रदेश कांग्रेस पर अब राष्ट्रीय आलाकमान का हंटर चलने की पूरी तैयारी हो चुकी है। दिल्ली के राजनैतिक गलियारों से आ रही खबर के अनुसार, कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को पद से हटाया जा सकता है। इस फेरबदल के बीच विंध्य के कद्दावर नेता, चुरहट से विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा है। उन्हें दोबारा मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कमान सौंपी जा सकती है।
डैमेज कंट्रोल में फेल रही टीम
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी मध्य प्रदेश के हालिया घटनाक्रमों को लेकर बेहद नाराज है। आलाकमान का मानना है कि राज्यसभा के चुनाव में प्रदेश इकाई द्वारा डमी उम्मीदवार का नामांकन पत्र दाखिल न करना एक बचकानी भूल थी। अगर डमी फॉर्म भरा होता, तो मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने के बाद भी मुकाबला जिंदा रहता। केंद्रीय नेतृत्व का कहना है कि प्रदेश संगठन और विधानसभा के कप्तानों की आपसी गुटबाजी व लापरवाही के चलते कांग्रेस ने बिना एक भी वोट डाले अपनी जीती-जिताई राज्यसभा सीट भारतीय जनता पार्टी की झोली में डाल दी, जिससे पूरे देश में पार्टी की किरकिरी हुई है। इतना ही नही चुनाव के दौरान सुरेश राजे और आरके दोगने जैसे विधायकों के बयानों को संभालने में भी मौजूदा नेता प्रतिपक्ष और पीसीसी अध्यक्ष पूरी तरह नाकाम साबित हुए।
दिल्ली बुलाए जा सकते है सिंघार!
विधानसभा के अंदर और बाहर पार्टी का ग्राफ गिरने के बाद दिल्ली दरबार अब एक्शन के मूड में है। सूत्रों का दावा है कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को एक-दो दिनों के अंदर फिर से दिल्ली तलब किया जा सकता है, जहां उनसे इस पूरे चुनावी ब्लंडर पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और उसके बाद उनके इस्तीफे को लेकर भी बात की जा सकती है।
अनुभव पर दांव लगाएगी कांग्रेस
मालवा अंचल से आने वाले उमंग सिंघार की जगह अब कांग्रेस आलाकमान विंध्य के सबसे सीनियर नेता अजय सिंह राहुल भैया पर भरोसा जताने का मन बना रहा है। अजय सिंह पहले भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और सदन की कार्यप्रणाली पर उनकी मजबूत पकड़ है।
समीकरणों को साधने की कोशिश?
राजनैतिक जानकारों की माने तो उमंग सिंघार को हटाने के बाद यदि अजय सिंह को कमान मिलती है, तो कांग्रेस को मालवा-निमाड़ में आदिवासी नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, विंध्य और ग्वालियर-चंबल के विधायकों को एकजुट रखने के लिए अजय सिंह से बेहतर विकल्प फिलहाल कांग्रेस के पास नहीं है। सूत्रों की माने तो इसी कश्मकश को दूर करने के लिए दिल्ली में मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर देर रात तक मंथन का दौर जारी रहा। फिर खबर सूत्रों के अनुसार है, हम इस खबर की पूरी तरह से पुष्टि नहीं कर सकते है।
