मध्य प्रदेश की सियासत में दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है. हाल के घटनाक्रमों ने इस सीट को लेकर नई हलचल पैदा कर दी है. पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की बढ़ती सक्रियता और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ उनकी हालिया बंद कमरे में हुई मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है. माना जा रहा है कि इस बैठक में संभावित उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए रणनीति पर गंभीर चर्चा हुई है.
नरोत्तम मिश्रा की होगी धमाकेदार एंट्री
दरअसल, दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई है. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द होने की स्थिति बन गई है. ऐसे में यह सीट खाली होने की कगार पर है और उपचुनाव की संभावना मजबूत मानी जा रही है. अगर पिछले चुनाव की बात करें तो 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को इसी सीट पर करीब 7,742 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में अब बदलते हालात उनके लिए एक बार फिर राजनीतिक वापसी का मौका बनते दिख रहे हैं. पार्टी के भीतर भी इस सीट को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि नरोत्तम मिश्रा और हेमंत खंडेलवाल के बीच हुई बातचीत में उपचुनाव की संभावित रणनीति, उम्मीदवार के चयन और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की गई. हालांकि इस मुलाकात को लेकर किसी तरह का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इसके सियासी मायने जरूर निकाले जा रहे हैं.
क्या करेगी कांग्रेस
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर कानूनी रास्ता अपनाया है और दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस मामले की सुनवाई 15 अप्रैल को प्रस्तावित है. अगर अदालत से कांग्रेस को राहत नहीं मिलती है, तो दतिया सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य हो जाएगा. विधानसभा के भीतर भी कांग्रेस की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिनहर पहले ही क्रॉस वोटिंग की आशंका जता चुके हैं. मौजूदा हालात में पार्टी के कई राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आने वाले समय में उसकी रणनीति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है. वहीं बीजेपी के नजरिए से देखा जाए तो दतिया सीट एक अहम अवसर के रूप में सामने आ रही है. अगर उपचुनाव होता है, तो पार्टी पूरी ताकत के साथ इस सीट पर दोबारा कब्जा जमाने की कोशिश करेगी. साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि नरोत्तम मिश्रा को राज्यसभा भेजने का विकल्प भी खुला रखा जा सकता है.


