P?c1=2&c2=41463588&cv=3.9
Friday, April 17, 2026
No menu items!
spot_img
Homeमध्यप्रदेशदिग्विजय सिंह का 'प्लान किसान'… बासमती के जियो टैग के लिए मैदान...

दिग्विजय सिंह का ‘प्लान किसान’… बासमती के जियो टैग के लिए मैदान में दिग्विजय

रिटायरमेंट प्लान को किया दरकिनार

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के रिटायरमेंट प्लान को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक कपल का वीडियो शेयर किया था, जो कि बैंक से रिटायर होकर एक कार से पूरा भारत घूमने के लिए निकले थे। उन्होंने वीडियो मजकिया लहजे में शेयर किया गया था, लेकिन अब इसके बाद उनका अगला प्लान सामने आ गया है, तो उनका अगला ‘प्लान किसान’ जनता के सामने आ गया, जब वो मीडिया से रूबरू हुए, उन्होंने कहा कि पार्टी का काम आखिरी सांस तक करुंगा।

नहीं रिटायर होंगे दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि ये हल्ला तो होता ही रहता है। सीधी सी बता है मैंने मेरी पार्टी के अनुरोध किया कि मुझे राज्यसभा थर्ड टर्म नहीं लेना चाह रहा हूं, लेकिन इस मतलब ये नहीं है कि मैं कांग्रेस के लिए काम नहीं करूंगा। पार्टी का काम तो जीवन की आखिरी सांस तक करेंगे, लेकिन पार्टी कहां मुझे कह सकती है ये पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करता है।

बासमती चावल की कीमतों पर रार
मध्यप्रदेश का बासमती चावल अपनी पहचान बनाता जा रहा था, इसी बीच दिग्विजय सिंह उनकी कीमतों और जिओ टैग को लेकर मैदान में उतर चुके हैं, दिग्विजय सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की कीमत तीन गुना है। क्या कारण है कि राज्य सरकार को इतने सालों से जीआई नहीं मिल पा रहा है। यूपीए सरकार ने जीआई टैग देना शुरू किया था। भाजपा सरकार आने के बाद हमारी सरकार में दिए जीआई टैग को निरस्त कर दिया गया था। मैं आज तक नहीं समझ पा रहा हूं कि हमारा इंटरनेशनल मार्केट में पाकिस्तान से कॉम्पिटीशन है, लेकिन पाकिस्तान ने कुछ सालों में कई जगह जीआई टैग दे दिए। हम 13 जिलों में जीआई टैग नहीं दिला पा रहे हैं।

दिग्विजय के निशाने पर केंद्र और राज्य सरकार
दिग्विजय सिंह ने इस मामले पर केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा था, जिसका खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि तीन महीने पहले पत्र लिखा था। उसमें केन्द्र और राज्य सरकार ने किसानों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। संसद के शीतकालीन सत्र में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था और मध्यप्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों को जीआई टैग नहीं मिलने से हो रही आर्थिक क्षति और अन्याय की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था।

बासमती के उचित मूल्य का सवाल
एमपी को एक समय सोयाबीन प्रदेश कहा जाता था, लेकिन समय परिस्थिति बदलने के बाद अब बासमती चावल की खेती के मामले में भी प्रदेश काफी आगे निकल गया है, ऐसे में ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों- श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर में हजारों किसानों ने उच्च क्वालिटी वाले सुंगाधित बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं। इसके बावजूद जीआई टैग नहीं मिलने के कारण किसानों को अपने उत्पाद का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। जिस पर दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार से सवाल किया है।

मनमोहन सरकार के निर्णय की दिलाई याद
मीडिया से रुबरु होने के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि राज्य के किसान पिछले दो दशकों से इन जिलों के बासमती चावल को जीआई टैग देने की मांग कर रहे हैं। साल 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन साल 2026 में केंद्र सरकार के द्वारा इसे वापस ले लिया गया। अभी पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, हरियाणा और दिल्ली को बासमती चावल का जीआई टैग मिलाहुआ है, जबकि मध्य प्रदेश के किसान इससे वंचित हैं। जिसको लेकर दिग्विजय सिंह ने जीओ टैग नहीं मिलने की स्थिति में अनशन का रास्ता अपनाने का ऐलान कर दिया।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

लेटेस्ट