डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिला मुख्यालय से लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की एक बेहद गंभीर खबर सामने आई है। यहाँ 33/11 केवी विद्युत उप केंद्र में काम करने के दौरान करंट की चपेट में आने से एक युवक बुरी तरह झुलस गया। हादसे के तुरंत बाद घायल युवक को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 जून को सुबह लगभग 11:00 बजे जिला मुख्यालय स्थित विद्युत उप केंद्र में यह हादसा हुआ। पीड़ित युवक बिजली के पोल पर चढ़कर जंपर ठीक करने का काम कर रहा था, तभी वह अचानक हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आ गया और बुरी तरह झुलस कर नीचे गिर गया.
इस पूरे मामले में विद्युत विभाग की एक और हैरान करने वाली कहानी सामने आ रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार , घायल युवक बिजली विभाग द्वारा अधिकृत कर्मचारी नहीं था।
कनिष्ठ अभियंता (ग्रामीण) ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग में नमो सिंह नाम का एक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत है। घायल युवक उसी आउटसोर्स कर्मी के साथ सहयोगी के तौर पर निजी रूप से काम करने आया था। विभाग ने उसे काम पर रखने या बिजली पोल पर चढ़ने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी थी।
इस हादसे ने विद्युत विभाग के सुरक्षा दावों और निगरानी तंत्र पर बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह है कि यदि युवक विभाग द्वारा अधिकृत नहीं था, तो वह इतनी कड़ी सुरक्षा वाले 33/11 केवी उप केंद्र के अंदर कैसे दाखिल हुआ। बिना शटडाउन या वरिष्ठों की सहमति के एक गैर-अधिकृत व्यक्ति को संवेदनशील बिजली पोल पर चढ़कर जंपर बनाने की अनुमति किसने दी?
यदि युवक के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो उसकी जान की जवाबदेही किसकी होती। जब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विद्युत विभाग के एसई (SE) राजेश धुर्वे से बात की, तो उन्होंने भी माना कि यह एक बेहद गंभीर मामला है।
एसई राजेश धुर्वे ने कहा: “निश्चित तौर पर यह एक बड़ी और गंभीर लापरवाही है। उप केंद्र के भीतर कौन काम कर रहा है और किसकी मौजूदगी है, इसकी पूरी जानकारी वहां के ज़िम्मेदार अधिकारियों और प्रभारियों को होनी चाहिए।”
अब देखना यह होगा कि इस हादसे के बाद विभाग के ज़िम्मेदार अधिकारियों और उस आउटसोर्स कर्मचारी पर क्या ठोस कार्रवाई की जाती है, जिसकी शह पर एक बाहरी युवक की जान जोखिम में डाली गई।
