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Friday, April 17, 2026
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सरकारी भवन निर्माण में मजदूरों से अन्याय… ठंड में दिनभर इंतजार

फिर भी नहीं मिली मेहनत की कमाई

डिंडौरी /शैलेश नामदेव /खबर डिजिटल/करंजिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पाटनगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के सरकारी भवन के निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के साथ गंभीर लापरवाही और शोषण का मामला सामने आया है। लाखों रुपये की लागत से बन रहे इस सरकारी भवन में काम करने वाले मजदूरों को न तो समय पर भुगतान किया जा रहा है और न ही पूरी मजदूरी दी जा रही है।
सोमवार को मजदूर अपनी मजदूरी पाने की उम्मीद में सुबह से ही निर्माणाधीन भवन के सामने जमा रहे। भीषण ठंड के बीच आग जलाकर खड़े मजदूर घंटों इंतज़ार करते रहे, लेकिन न तो ठेकेदार आया और न ही किसी ने भुगतान की सुध ली। मजदूरों ने बताया कि सोमवार को साप्ताहिक बाजार (गोरखपुर बाजार) होने के कारण उन्हें घरेलू जरूरतों राशन, सब्जी, दवाइयां आदि की खरीदारी करनी होती है, जो पूरी तरह मजदूरी पर ही निर्भर रहती है।

भाजपा नेत्री ने जताई नाराजगी
इसी दौरान भाजपा नेत्री एवं जनपद पंचायत उपाध्यक्ष करंजिया गीता पट्टा अपने गृह ग्राम पाटन लौट रही थीं। उन्होंने बड़ी संख्या में ग्रामीणों और मजदूरों को ठंड में खड़े देखा तो वाहन रुकवाकर स्थिति की जानकारी ली। मजदूरों ने उन्हें बताया कि वे सभी इसी सरकारी भवन में काम करने वाले श्रमिक हैं और सुबह से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मौके से ही गीता पट्टा ने संबंधित व्यक्ति से दूरभाष पर संपर्क किया, जहां से आश्वासन दिया गया कि मजदूरी भुगतान की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन इसके बावजूद लंबे इंतज़ार के बाद भी कोई भुगतान नहीं हुआ। शाम तक निराश मजदूर खाली हाथ घर लौटने को मजबूर हो गए।

ठेकेदार करता है टालमटोल
मजदूर रवि पडवार ने बताया कि ठेकेदार काम तो पूरा कराता है, लेकिन भुगतान के समय आधा-अधूरा पैसा देता है या टालमटोल करता है। “आज तो हद हो गई, सुबह से शाम हो गई, लेकिन न ठेकेदार आया, न कोई भुगतान करने,” इस पूरे मामले पर जनपद उपाध्यक्ष गीता पट्टा ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि “यह बड़ी लापरवाही है। जिनसे काम कराया गया है, उन्हें समय पर पूरा भुगतान मिलना चाहिए। मजदूरों के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैं इस संबंध में कलेक्टर से मुलाकात कर वस्तुस्थिति से अवगत कराऊंगी।” सरकारी भवन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में मजदूरों के साथ हो रहा यह व्यवहार न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि श्रम कानूनों के उल्लंघन की ओर भी इशारा करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब और क्या ठोस कार्रवाई करता है।

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