Tuesday, November 3, 2026
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Dry Fruits Price: प्याज-चीनी के बाद अब ड्राई फ्रूट्स ने बिगाड़ा बजट, 20 से 80% तक महंगी हुई कीमतें

त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले ही आम लोगों के घरेलू बजट पर महंगाई का असर दिखाई देने लगा है. प्याज और चीनी के बाद अब ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार नजदीक आने के साथ सूखे मेवों की मांग बढ़ गई है. इसका असर खास तौर पर गुजरात और महाराष्ट्र के बाजारों में देखने को मिल रहा है.

कई बाजारों में 20 से 80 फीसदी तक बढ़े दाम

गुजरात और महाराष्ट्र देश में ड्राई फ्रूट्स के बड़े व्यापार और प्रोसेसिंग केंद्र माने जाते हैं. अहमदाबाद और सूरत के अलावा महाराष्ट्र के मुंबई स्थित वाशी होलसेल मार्केट में भी कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है. बाजार कारोबारियों के अनुसार कुछ ड्राई फ्रूट्स के थोक और खुदरा भाव में करीब 20 से 80 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है.

इस तेजी से आने वाले दिनों में त्योहारों की खरीदारी करने वाले लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.

15 दिन में 300 रुपये तक महंगे हुए ड्राई फ्रूट्स

पुणे के बाजार में पिछले करीब 15 दिनों के दौरान ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेजी आई है. बादाम, काजू और पिस्ता के भाव में प्रति किलो 100 से 300 रुपये तक का इजाफा बताया जा रहा है.

गुलटेकड़ी मार्केट यार्ड के कारोबारियों के मुताबिक सावन के बाद अब लगातार त्योहार आने वाले हैं. ऐसे में ड्राई फ्रूट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. मांग बढ़ने के साथ बाजार में उपलब्धता कम होने से कीमतों पर दबाव बढ़ गया है.

विदेशों में कम उत्पादन का भी असर

ड्राई फ्रूट्स की कीमत बढ़ने के पीछे सिर्फ घरेलू मांग ही जिम्मेदार नहीं है. कारोबारियों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन कम रहने का असर भारतीय बाजार की सप्लाई पर भी पड़ा है. विदेशों से आने वाली खेप में कमी के कारण स्थानीय बाजार में उपलब्धता घट रही है.

इसके अलावा माल ढुलाई और परिवहन लागत बढ़ने से भी कारोबारियों की लागत बढ़ी है. इसका सीधा असर ग्राहकों को मिलने वाली कीमतों पर दिखाई दे रहा है.

बादाम और पिस्ता की आवक में बड़ी कमी

पुणे की ड्राई फ्रूट मंडी में बादाम की साप्ताहिक आवक पहले करीब 10 से 20 टन के बीच रहती थी. अब यह घटकर लगभग 5 से 10 टन रह गई है. इसी तरह पिस्ता की आवक में भी गिरावट दर्ज की गई है. पहले हर सप्ताह करीब 400 से 500 किलो पिस्ता बाजार में पहुंचता था, लेकिन अब इसकी मात्रा घटकर लगभग 250 किलो रह गई है.

त्योहारों में और बढ़ सकती है मांग

रक्षाबंधन से लेकर दिवाली तक लगातार त्योहारों का सिलसिला रहने वाला है. इन मौकों पर मिठाई, पूजा सामग्री और उपहारों के साथ ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी भी बढ़ जाती है. ऐसे में अगर सप्लाई में सुधार नहीं हुआ और मांग लगातार बढ़ती रही, तो आने वाले दिनों में काजू, बादाम और पिस्ता समेत दूसरे सूखे मेवों की कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है.

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